Thursday, May 27, 2010

जान से प्यारा यार हमारा , भाग-२०

कम्मो- तुम्हारे साथ रहूंगी तो समझदानी क्या बहुत कुछ बड़ा हो जाएगा .
शिल्पा- तुम्हें भी हवा लग चुकी है मेरी जान. आज खूब आनंद उठाया है, कल इससे भी ज्यादा सुख दूंगी , तुम्हें बाते था न ग्रुप सेक्स के बारे में . हमारे यहाँ पर भी अब इसका चलन जोर पकड़ने लगा है .
कम्मो- हाँ, शायद किसी देश में एक प्रोफ़ेसर भी ग्रुप सेक्स के लिए पार्टियां आयोजित करने के जुर्म में पकड़ा गया था,उसे कुछ साल की कैद भी हुई थी, मजा है तो सजा भी है , उसे कौन भुगतेगा ? वैसे उसने दलील दी थी कि उसने व्यसक लोगों को उनकी इच्छा से सेक्स के लिए आमंत्रित किया था , मगर आखिरकार उसे सजा हुई . शायद उसने अगली अदालत में सजा के खिलाफ अपील भी की है. हार मानने वाला नहीं है प्रोफ़ेसर .
शिल्पा- ये लोग इतनी सेक्स पावर कहाँ से लाते हैं , जो एक रात में कई -कई साथियों को संतुष्ट कर देते हैं?
कम्मो- परफेक्स है न. परफेक्स कैप्सूल खा-खाकर ताकत पैदा करते हैं. इससे जोश बढ़ जाता है और जूनून भी. सेक्स करने की शक्ति कई गुना बढ़ जाती है . यह भारत की दवा है मगर अब धीरे -धीरे इसकी दीवानी पूरी दुनिया हो रही है.
शिल्पा- तुम्हें कैसे पता चला ये राज ? क्या तुम भी उसके संपर्क में हो ?
कम्मो- हाँ, तो क्या हुआ ? आजकल ऑरकुट , फेसबुक , ट्विटर से पूरे वर्ड के लोगों से आसानी से दोस्ती बनाई जा सकती है. हम लोग अक्सर चैट करते थे , प्रोफ़ेसर मुझे ग्रुप सेक्स के अपने अनुभव सुनाया करता था. यहाँ तक कई बार हम चैटिंग के द्वारा सेक्स का मजा भी लिया करते थे, वह मैसेज भेजता था -
-फील करो कि मै तुम्हारे कपडे उतार रहा हूँ,आहिस्ता- आहिस्ता तुम नग्न होती जा रही हो. इसके बाद अब ये महसूस करो कि तुम भी जोश में आ गयी हो तुमने मेरे कपडे उतारने शुरू कर दिए हैं. धीरे -धीरे हम दोनों वस्त्रहीन हो रहे हैं. हम दोनों अब करीब आने लगे हैं, तुम मेरे खास अंग को निहार रही हो , तुम उसे सहलाने के लिए बेताब हो , मैंने तुम्हारे यौवन द्वार तक अपनी एक उंगली पहुचा दी है . तुम आह कह उठी हो . तुम्हारे अरमान मचलने लगे हैं, मेरी बांहों में आकार तुम बस बिछ जाना चाहती हो . तुम बेताब हो रही हो ...
शिल्पा- हा, और तुम भी महसूस करो कि मैंने तुम्हारे विशेष अंग को चूम लिया है, इससे वह काले नाग की तरह फडफडाने लगा है . मेरी बेताबी की तरह तुम भी बेताब हो रहे हो. समा जाना चाहते हो मुझमे.
प्रफेसर- आह. अब देखो, तुम मेरे होठों का किस कर रही हो, यह दीर्घ चुम्बन है . बेहद दीर्घ . हम दोनों प्यार के सागर में गोते लगाने के लिए बेचैन हैं.महसूस करो , मेरी साँसे , मेरी धडकन, ये सिर्फ तुम्हारे लिए धड़क रही हैं.
शिल्पा- अब हम दोनों नग्न हो चुके हैं, तुम हो न मेरे साथ ? सुनो, अब हम नग्न हैं. हम दोनों का जिस्म एक दूसरे के जिस्म से सटा हुआ है. हम प्यार करना चाहते हैं. इश्क की इस नगरी में हमारे साथ कुछ मीठी यादें भी हैं वे यादें जो हमें पिछली बार के सम्बन्ध से मिली थीं.
प्रोफ़ेसर. मैन ट्रांसलेटर की मदद ले रहा हूँ, इसलिए जवाब देने में देरी हो रही है. वैसे मैन तुम्हारे साथ हूँ, तुमसे जुडा हुआ हूँ .आखिर आज हमारी सुहागरात जो है. यह शायद पहली बार हो रहा है कि तुम जैसी खूबसूरत और समझदार पार्टनर मेरी बांहों में है. मै कबसे तरस रहा था, तुम जैसी साथी के लिए , ऐसे तो तुमसे पहले मैंने बहुत सी कुंवारी लड़कियों के साथ रात बिताई हैं, मगर तुम्हारे साथ जो खास अनुभव है, उसकी कोई मिसाल नहीं/. यह सबसे न्बेह्त्रीन अनुभव है . लगता है जैसे मै हवा में उड़ रहा हूँ.
शिल्पा- अच्छा, मै भी ट्रांसलेटर की मदद ले रही हूँ. क्योंकि मैन भी आपकी भाषा नहीं जानती .
प्रोफ़ेसर- जब आपस में प्यार हो तो भाषा कलोई मायने नहीं रखती , दिल अपने आप कोई न कोई राह निकाल ही लेता है शिल्पा- मेरा दिल तो कैद हो गया है तुम्हारी बांहों में . बहुत सुन्दर हो तुम भी.

Tuesday, May 25, 2010

प्यार से प्यारा , यार हमारा भाग-१८

कम्मो- हाँ , समझने की कोशिश कर रही हूं, आपके साथ रहूंगी तो सब कुछ जान भी जाउंगी . थोड़ा -थोडा तो समझ ही रही हूँ, बड़े पते की बात कह रही हो , इस एंगल से भी तो सोचना जरूरी है . अच्छा किया आपने जो समझा दिया.
शिल्पा - चलो अच्छा हुआ , अब मुझे तसल्ली हुई कि मैन ऐसी विद्वान महिला की साथी बन्ने जा रही हूँ , जो निष्पक्ष भाव से सोचती है. लड़का हो या लड़की कोई भेदभाव नहीं रखती हो . दूसरों से भी सावधान रहने की अपील करती हो और अपनों से भी . यह अच्छा ही हुआ मेरी जान. देखा, अब मुझे जान कहने की आदत भी लगती जा रही है, बिलकुल तुम्हारी तरह.
कम्मो - ये क्या कह रही ही, यह तो मेरी वाली आदत है और आप इसे किसी और का नाम कह रही हैं.
शिल्पा- तुम्हारे और मेरे बीच में अब फर्क ही क्या रहा है ? तुम भी मेरी अपनी ही हो चुकी हो . हम दोनों के शरीर एक हो चुके हैं. हमारी आत्मा एक हो चुकी हैं. अब हमें फर्क क्या पड़ता है ? कौन कहेगा कि हम दोनों अलग- अलग हैं ? और अगर कहेगा भी तो कोई फर्क नहीं पड़ने वाला , क्योंकि जब आत्माओं का मिलन हो जाता है तो जिस्म बहुत पीछे छूट जाता है . सच कहती हूँ, मेरी जान. ये आध्यात्मिक बातें हैं. अब अगर तुम्हें कोई तकलीफ होगी तो मैन समझूंगी कि दर्द मुझे हो रहा है . और जब मै यह फील करूंगी तो ऐसा हो जाना कोई बड़ी बात नहीं है .
कम्मो- वाह, तुम्हारे शब्दों में अथाह शक्ति है शिल्पा. इस शक्ति से भी मेरा साक्षात्कार कराओ न.
शिल्पा -आहिस्ता -आहिस्ता सब कुछ ठीक ठाक हो जाएगा , सब जान जाओगी . अब मेरे बिकुल करीब आ जाओ . इतने करीब कि फिर कोई दूरी ही न रह जाए , बदन में बड़ी अगन सी लगी है .
कम्मो - मै भी बेताब हूँ , बेकरारी ने मेरे जिस्म को अकड लिया है . अब समझ में नहीं आता कि इसे इस तरह कैसे मजा आएगा ? मै तुम्हे कैसे इतना आनंद दे पाउंगी जैसा कि तुम मुझे दिया करता करती थी ... क्योंकि तुमने जब शुरुआत की थी तो बड़ा मजा आया था . इतना मजा मै दे पाउंगी कि नहीं ?
शिल्पा - तुम शुरुआत तो करो मेरी जान, इसके बाद सब कुछ ठीक हो जाएगा . ऐसा सुख मिलेगा कि सब रिकार्ड टूट जायेंगे , किसी तरह की कोई दिक्कत मत रखो . उलझन मत रखो, एक राज की बात ये भी है कि इस तरह जो लोग उलझन के शिकार होते हैं , उन्हें सफलता भी कुछ देरी से मिलती है . उलझा-उलझकर . समझी तुम ? इसलिए अभी से इस बात को गांठ बाँध लो और अपने काम में लग जाओ . अपना कर्तव्य पूरा करो .
कम्मो को जोश आ गया. शिल्पा के कहने का तरीका ही ऐसा होता था कि मुर्दे में भी जान आ जाती थी. कम्मो ने सेक्स के कुछ गुण उस फिल्म से भी सीख लिए थे , उसने अब वही तरीके इस्तेमाल करने शुरू कर दिए . वह कम्मो की जीभ का भी चुम्बन ले रही थी. शिल्प उसका भरपूर साथ दे रही थी. दोनों के जिस्म कुछ ही देर में अंगारे की तरह दहक रहे थे . कम्मो पहल करती जा रही थी और शिल्पा उकस समर्थन कर रही थी . और जब उनकी जवानी ज्वालामुखी के तरह दहकने लगी तो शिल्पा बावरी सी हो उठी वह कम्मो की गोलाइयों को जोर -जोर से चूमने लगी . उसकी उँगलियाँ कम्मो के यौवन द्वार पर दस्तक दे रही थीं. सेक्सी आह का सिलसिला एक बार फिर शुरू हो गया , और तब तक चलता रहा जब तक उन दोनों सहेलियों के शरीर की गर्मी पूरी तरह शांत नहीं हो गयी, एसी कमरे में भी वे दोनों पसीने से लथपथ थीं. जैसे कोई बहुत बड़ी जंग लड़ रही हों, देखा जाए तो ये जंग थी भई. एक लड़की कुदरत के चुनौती देकर दुसरी लड़की की जिस्मानी भूख को शांत कर रही थी. और इस समय वे दोनों खुश भी दिखाई दे रही थीं. यह सफलता की मुस्कराहट थी. इस खुशी में उन दोनों की हालत ऐसी हो गयी , जैसे सचमुच किसी पति-पत्नी के जोड़े की होती है. शिल्पा ने बाकायदा कम्मो के गालों का चुम्बन लिया और फिर उसके मस्तिष्क को चूमते हुए बोली-
- बहुत मजा आया. तबियत खुश हो गयी यार . तुम अपनी कहो , तुम्हें सुख मिला कि नहीं ?
कम्मो- तुम खुश तो मै खुश , वैसे , जब तुम प्रणय क्रीडा की पहल करती हो तब मुझे सबसे ज्यादा खुशी होती है .
शिल्पा- कोई बात नहीं , अब जब कल मौज मस्ती करेंगे तो उसका नेतृत्व मै करूंगी अब तो खुश हो? काउंटर पर फोन करने दो गिलाश जूस का ऑर्डर दे दो.जितनी ऊर्जा खत्म हुई है, उसकी आधी तो कम से कम मिलनी ही चीहिए .











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Monday, May 24, 2010

प्यार से प्यारा , यार हमारा भाग-१६

तभी शिल्पा ने कहा-
-कुदरत का सबसे अनमोल तोहफा प्यार है। यह बाँटने से और बढ़ता है तथा अपनी भीनी-भीनी महक को प्रकृति में चारों ओर बिखेर देता है। यूँ तो प्यार के प्रेम, इश्क, लव रोमांस, चाहत, मोहब्बत जैसे कई प्यारे नाम हैं पर प्यार की खूबसूरती पर इन नामों का कोई असर नहीं होता है। लोग बदल जाते हैं, पर प्यार कभी नहीं बदलता है। यह तो ऐसा संक्रामक रोग है जो देखने से भी फैलता है और कभी भी, कहीं भी, किसी को भी हो सकता है।
कम्मो- हां, कुछ लोग कहते हैं कि प्यार किया नहीं जाता, बस हो जाता है। पर प्यार देखकर, समझकर तो किया ही जा सकता है। प्यार क्या है, किससे करें, कब करें ऐसे कई अनसुलझे सवाल हैं कि अगर जानबूझकर इन्हें नजरअंदाज किया जाए तो अंत में निराशा तथा दिल के टूटने की आहट ही सुनाई देती है। कई बार जिएँगे तो साथ-मरेंगे तो साथ ऐसी कसमें खाकर उसे निभाने के वादे तो लोग कर लेते हैं लेकिन प्रेम में परवान चढ़ते-चढ़ते जब जिंदगी की हकीकत से सामना होता है तो सारे सपने उनके कदमों तले टूटकर बिखर जाते हैं और कुछ दिनों का इश्क जीवनभर के अश्क बन जाता है।
यह स्थिति स्वाभाविक भी है क्योंकि जब कोई किसी से सच्चा प्रेम करता है एवं केवल सामने वाले के रूप-रंग से आकर्षित नहीं होता बल्कि उसकी सीख से प्रेम करता है तो वह कभी भी यह जानने की कोशिश नहीं करता है कि वह जिसके इश्क में गिरफ्तार है कई आशिकों की गाड़ी जब प्यार के प्लेटफार्म से गुजरकर शादी के स्टेशन पर रुकती है तो बिना टिकट के यात्री की तरह इनकी सचाई भी सामने आने लगती है। ऐसे में समझदार माँ-पिता केवल प्यार के नाम पर ही बेटे-बेटी की शादी उस लड़के-लड़की से करने को तैयार नहीं होते हैं जो केवल प्यार का दम भरता है। ऐसे मामलों में अगर कभी शादी हो भी जाए तो लोग कुछ दिनों तक तो मदद करते हैं, फिर तो दोस्त भी कन्नी काट लेते हैं।
शिल्पा- यूँ तो प्यार में चोट देने वाला, पहचान के बाद भी चोट दे सकता है। पर फिर भी थोड़ी खोजबीन जरूरी है। आपने देखा भी होगा कि कोई आपको प्यार तो बहुत करता है पर कह नहीं पाता या फिर हमेशा ही जताता रहता है। ऐसी स्थिति में कभी-कभी आप बड़ी उलझनों में भी घिर जाते हैं। इन समस्याओं से बचने और अपने प्यार को परखने के लिए कुछ सामान्य से उपाय करके देखिए, अगर सामने वाला चाहता है और आपके लिए कुछ भी करने को तैयार है परंतु इस बात को अहसान बताकर याद दिलाता रहता है तो समझ लेना चाहिए कि वह आपसे प्यार नहीं करता है और आपको अपने अहसानों तले दबाकर रखना चाहता है।
अगर आपको पसंद करने वाला आपकी सभी बातों का समर्थन करे। चाहे गलत हो या सही, तो मानना चाहिए कि सामने वाला आपको पाने के मकसद से ही आपकी गलतियों को छिपा रहा है। ऐसा वह किसी और स्थिति में भी कर सकता है। अगर आपको पसंद करने वाला आपकी सभी बातों का समर्थन करे, चाहे गलत हो या सही, तो मानना चाहिए कि सामने वाला आपको पाने के मकसद से ही आपकी गलतियों को छिपा रहा है। ऐसा वह किसी और स्थिति में भी कर सकता है,यदि कोई लम्बे समय तक आपसे मिलता रहे, प्यार जताता रहे परंतु शादी की बात बिना किसी बड़े कारण के टालता रहे तो निश्चित ही वह आपसे शादी नहीं करना चाहता है। केवल टाइमपास बना रखा है। ऐसे में तत्काल निर्णय लेना चाहिए। शादी से पहले ही अगर साथी का व्यवहार एवं माँगें अनुचित हों तथा तरह-तरह के प्रलोभन देकर वह केवल अपनी बात ही मनवाना चाहे तो स्वयं फैसला कीजिए कि ऐसा साथी जीवन के सफर में आप से कितनी वफा निभा सकेगा।जानती हो येबातें मै तुम्हें क्यों बता रही हूँ ?
कम्मो- क्यों ?
शिल्पा- क्योंकि जिस तरह लड़के बदमाश होते हैं, वैसे ही लड़कियां भी कम नहीं रहतीं. तो सामने वालों से हमको सावधान रहना चाहिए . समझ रही हो कि नहीं ?








Sunday, May 23, 2010

प्यार से प्यारा , यार हमारा भाग-१५

अगर कोई सेक्स के बीच में आता है तो जल्लाद जैसा लगता है . चाहे वे बातें हों कि इंसान , कुछ फर्क नहीं पड़ता .
कम्मो- तो तुम्हारा इशारा मेरी बातों की तरफ है . विषय की तरफ है . समझ गयी .
शिल्पा- जी हाँ, बिलकुल . थोड़ी देर पहले तो गर्म हो गयी थीं, अंगारे की तरह दाहक रही थीं , फिर अब अचानक क्या हो गया ? ऐसा क्या हुआ कि एकदम नीरस बातें करने लगीं, मुझे भी पहले ध्यान नहीं आया , मगर जब लगा कि मेरा करंट भी धीमा पड़ने लगा है तब जाकर मैंने तुम्हें चेताया ..
कम्मो- हाँ, यार . अच्छा हुआ बता दिया तुमने ,सचमुच मैन भी बहक गयी थी . बात ऐसे बदली कि फिर आगे बढ़ती चली गयी, ये मेरा पहला दिन है , मुझे प्रणय क्रीडा का लंबा एक्सपीरियंस तो है नहीं . मैंने सोचा कि आराम से करेंगे तो मजा भी लंबा खिचता जाएगा , लेकिन इसका उलटा ही हुआ . बजाय फायदे के नुक्सान हो गया.
शिल्पा- अब बातें कम और काम ज्यादा करना होगा . चलो मेरे सीने को आहिस्ता -आहिस्ता सहलाना शुरू करो . इसके बाद फिर इन चिकनी जाँघों को सहलाना, जब मुझे आनंद आने लगेगा तब मै तुम्हें सुख दूंगी .
कम्मो- आह, अब ठीक रहेगा , मै इसके लिए भी तैयार हूँ. कोशिश करती हूँ कि तुम्हें कितना आनंद दे पाती हूँ.
शिल्पा- तुम अगर करोगी तो अच्छा ही करोगी , धमाल करने में माहिर हो तुम.
कम्मो- इतना विश्वाश करती हो , तो यकीं मानो इस भरोसे को कभी कम नही होने दूंगी.
शिल्पा उसे देखती रह गयी, उसके आत्म्विश्वाश से भरे शब्दों ने शिल्पा को खूब सुकून बक्शा . इस वक्त वे दोनों नग्न अवस्था में थीं, दोनों के जिस्म में कामवासना की गर्मी दौड रही थी. कम्मो अब शिल्पा के मजबूत उभारों को सहला रही थी , उसकी रग -रग में मस्ती का संचार होने लगा . शिल्पा अपनी पलक बंद करते हुए बोली-
- वाह , कितना सुख मिल रहा है . कैसे बताऊँ, सच कहूँ तो इसे मापने का कोई पैमाना ही नहीं है . जी चाहता है कि प्रेम की यह यात्रा ऐसे ही चलती रहे , बस इसी तरह सुख के समुंदर में गोते लगाती रहूँ.
कम्मो- मैंने तो ऊपरवाले से तुम्हें पहले ही मांग लिया है . अब तो जीना -मरना साथ -साथ ही होगा .
शिल्पा ने लंबी आह भरी . हाथ ऊपर किये , एक कातिल अंगड़ाई ली और कम्मो के होठ चूम लिए , यहाँ से शुरुआत करने के बाद वह रुकी नहीं , अच्छी तरह से लबों का रसपान करने के बाद वह उसकी गोलाइयों को रगड़ने लगी , इस बार उसके हाथ का दवाब कुछ ज्यादा था , तभी तो कम्मो ने उसका विरिध करना चा , लेकिन शिल्पा की अदा कुछ ऐसी थी कि वह कुछ नहीं कह पाई कुछ पलों के बाद उसने शिल्प के रंग में रंगना चालू कर दिया. उसने भी शिल्पा के सीने की पर्वत चोटियों पर अपनी पकड़ मजबूत बनादी . अब दोनों एक ही रफ़्तार से आगे बढ़ रही थीं, उनके मुख से जो कामोत्तेजक आहें निकल रही थीं, उन आहों ने होटल के कमरे का तापमान भी बढ़ा दिया था . ऐसा लगता था जैसे सदियों पुराने बिछडा युगल मिल गया हो और अपनी वर्षों के प्यास बुझाने के लिए जद्दो जहद कर रहा हो . कम्मो सोच रही थी कि उसने कभी सपने में भी यह उम्मीद नहीं की थी कि ऐसा भी हो सकता है. कोई महिला ही दुसरी महिला को बिस्तर पर सुख संतुष्टि प्रदान कर सकती है. यह तो एकदम नया प्रयोग था. अब उसे किसी मर्द से दोस्ती करने की जरूरत नहीं थी , अब वह मर्दों के सहयोग के बिना भी अपना कैरियर बना सकती थी, और सबसे बड़ी बात कि बिना किसी झंझट के मस्ती भरे दिन गुजार सकती थी. ना तो गर्भवती होने की दिक्कत और ना ही कोई बदनामी वाली बात . अगर कोई जवान लड़की किसी लड़के के साथ घूमती फिरती है तो बिना कुछ किये धरे ही बदनाम हो जाति है . आजकल के कुछ लड़के ऐसे बदमाश हो गए हैं कि पहले तो लड़की का शारीरिक शोषण करते हैं और फिर उसको ब्लेकमेल करने लगते हैं. लड़कियों के साथ रहने में ऐसी कोई समस्या नहीं है . खूब मजा लेने के बाद भी कोई शक नहीं करता . किसी का नुक्सान भी नहीं होता और मौज मस्ती भी पूरी मिल जाती है .

























Saturday, May 22, 2010

प्यार से प्यारा , यार हमारा भाग-१४

कम्मो कुछ ज्यादा ही जोश का प्रदर्शन कर रही थी , शिल्पा तो खेली खाई खिलाड़ी थी जबकि कम्मो का यह पहला अवसर था , वह इतनी ज्यादा उत्तेजित हो गयी कि फिर कुछ होश ही नहीं रहा, वह शिल्पा के जिस्म से ही खिलवाड करती रही , इस बीच शिल्पा उसको उकसाती रही , अश्लील बातें करती रही ताकि वह उसको खूब उत्तेजित कर सके. कम्मो भी उसका सही जवाब दे रही थी. कम्मो के मन में वासना का तूफ़ान उठने लगा . वह जल्द से जल्द मंजिल पर पंहुचने के लिए बेताब होने लगा. शिल्पा के होठ भी थरथराने लगे . बोली-
-कम्मो रानी, अब तो तुम भी एटम बम बन चुकी हो. बहुत बढ़िया साथ दे रही हो, सोचा नहीं था मैंने कि इतना आनंद आएगा , इतनी जल्दी तुम प्रणय क्रीडा करना सीख जाओगी .
शिल्पा- हां, सोचा तो मैंने भी नहीं था मगर करते-करते सब कुछ हो गया. अब ये बताओ कि ये तड़प हमें कब तक सहनी होगी ? बदन जल रहा है . कुछ -कुछ होने लगा है. इस बार शुरुआत तुमको करनी होगी, मैन उसका समापन करूंगी. जब प्यार करने के नुस्खे सीख गेई हो तो इन्हें अमल में भी लाओ ...
कम्मो- हुक्म की तामील की जायगे , मगर , मगर सच तो ये है कि इस खेल में जो मजा है उसकी जितनी तारीफ़ की जाए वो कम है. मंजिल पर पहुच जाने पर तो सुख की अनुभूति होती ही है , लेकिन राहों में चलने पर जितना आनंद आता है, वह असीम होता है . थोड़ी देर तक हम दोनो इसी सुख को भोगंगे , इसके बाद चरम सुख की प्राप्ति करेंगे .
शिल्पा - वाह कम्मो, मजेदार बात कहदी है तुमने . बड़े पते की बात कहदी है, सच यही है मेरी जान. मजा तो इसीमे हैं, बाकी हर चीज भूल सकते हैं मगर इस प्रणय क्रीडा को कभी नहीं भूला जा सकता.
कम्मो- हां, धीरे -धीरे सीख रही हूँ तुमसे , इसी तरह मैन तुम्हें फोलो करती रहूंगी . अब आप आ जाएँ मेरे ऊपर .
शिल्पा- आप जैसा शब्द बड़ा औपचारिक लगता है कम्मो. तुम कहकर ही पुकारा करो , वही अच्छा लगता है.
कम्मो - हाँ कभी-कभी मुंह से निकल जाता है , मेरे मन में एक जिज्ञासा पनप रही है , कहो तो पूछूं?
शिल्पा- बिंदास यार , जो चाहो सवाल कर सकती हो, तुम्हें इजाजत लेने के जरूरत नहीं है .
कम्मो- मै ये जानना चाहती थी कि ये समलैंगिक सम्बन्ध सेहत के लिए नुकसानदायक तो नहीं होते ?
शिल्पा- वैसे अभी तक नुक्सान दायक होने के बात तो सामने नहीं आई है. कम से कम वैज्ञानिक द्रष्टिकोण से तो ये बात कभी साबित नहीं ही. अचानक ये सवाल क्यों ?
कम्मो- बस ऐसे ही पूछ बैठी, क्योंकि अगर हमारे पूर्वजों ने पुरुष और महिला के विवाह संबंधों को मान्यता दी है, सदियों से लोग ऐसा करते आ रहे हैं तो जरूर इसके पीछे कोई सकारात्मक द्रष्टिकोण हो सकता है.
शिल्पा- इतना सोचना ठीक नहीं होता. मन को जो अच्छा लगे वो करना चाहिए , वही अच्छा होता है.
कम्मो- हाँ मगर कभी -कभी मन ऐसी चीजों को चाहने लगता है जो कि शरीर के लिए हानिकारक होती हैं, उदाहरण के लिए ताली हुई चीजों को देखकर मुंह में पानी आ जाता है , मगर उसके ज्यादा खाने से गैस और अपच हो है. मोटापा बढ़ने लगता है . और हम जानकर भी उसका सेवन करते रहते हैं.
शिल्पा- तुम्हें नहीं लगता कि हम लोग सब्जेक्ट से भटक रहे हैं. ऐसे रंगीन क्षणों में नीरस बातों का कोई महत्त्व नहीं होना चाहिए , सिर्फ प्यार भरी बातें करो ठीक उसी तरह जैसे मयखाने में बैठकर मयकश लोग बोलते हैं -'ला पिलादे साकिया पैमाना पैमाने के बाद , होश की बातें करेंगे होश में आने के बाद . तो पीने के बाद भी वे इतने होश में होते हैं कि होश की बातें होश में आने के बाद कहने की बात करते हैं. तो काम की क्वालिटी ऐसी होनी चाहिए प्यार तो प्यार और सेक्स तो सेक्स.












Friday, May 21, 2010

प्यार से प्यारा , यार हमारा भाग-१३

कम्मो- बहुत खूब शिल्पा. ये बहुत सही जानकारियाँ मिली हैं . न जाने कैसे इतना याद कर लेती हो , तुम्हारी जुबान पर साक्षात लक्ष्मी का वास है. मुझे भी इस स्मरण शक्ति राज बतादो.
शिल्पा- खुश रहो, जो भी कहो या सुनो उसे ध्यान से दिल लगाकर करो, और अपने मन को , दिमाग को ये समझा दो कि जो कुछ तुम सुन रही हो , वह तुम्हें याद हो गया है . जब अपने दिल को आत्मविश्वाश के साथ कहोगी तो वहाँ से भी सकारात्मक प्रतिक्रीया आएगी, ये निश्चित है .
कम्मो- शिल्पा- तुम मनोविज्ञानियों जैसी बात करती हो , तुम्हारी बातें शुरुआत में थोड़ी सी कठिन लगती थीं मगर अब सब कुछ सामान्य हो गया है. अब बातें ध्यान में आने लगी हैं.
शिल्पा- चलो , अच्छा हुआ , कम समय में इतना तो सीखा, मैंने भी तुमसे फोलो करने का तरीका ठीक तरह से सीख लिया है . अब और भी आगे सीखते रहने का इरादा है . होटल में कम आनंद आता है . अपना घर लेकर रहेंगे .
कम्मो- क्या ऐसा संभव है ? अभी तो मेरो नौकरी बी ही नहीं लग पायी है .
शिल्पा- सिर्फ छ महीने में सब कुछ ठीक हो जाएगा . कल के कल नौकरी पक्की समझो . इसके बाद तुम्हारा बेंक खाता खुलवा दिया जाएगा . छ माह के बाद तुम्हारे और मेरे नाम से आसानी से होम लोन हो जाएगा , मै ऐसे कई एजेंटों को जानती हूँ जो दो से तीन पर्सेनेट लेकर फ़टाफ़ट लोन उपलब्ध करा देते हैं, पेन कार्ड , आईटी रिटर्न सब कुछ हो जाएगा .
कम्मो- इसका मतलब आल् राउंडर हो शिल्पा , सब कुछ जानती हो ...
शिल्पा- नहीं यार , सब कुछ जानती हूँ, वहां ये नहीं पालती, हाँ काम चलाऊ तो सब जानना ही पड़ता है न. तुम खुद भी जान जाओगी , मुझे एक जोक याद आ गया, एक युवती जब गर्भवती हुई तो उसने अपनी सास से कहा कि जब उसको बच्चा पैदा हो तो बता देना, इस पर सास बोली कि फ़िक्र मत कर , जब तुझे बच्चा पैदा होने वाला होगा तो तो तू खुद ही चिल्ला-चिल्लाकर सारे मोहल्ले को जगा डालेगी . तेरे साथ भी ऐसा ही होने वाला है . तू भी इस मुंबई नगरिया में कुछ साल रहने के बाद सयानी हो जायेगी .
वे दोनों एक दुसरे के जिस्म से सटकर आनंद भी ले रही थीं और बातचीत भी करती जा रही थीं.जब शिल्पा ने महसूस किया कि कम्मो कुछ ज्यादा ही कमजोर पड़ती जा रही है उसने उसे गर्म करना शुरू कर दिया, वैसे तो शिल्पा की स्टायल ये थी कि वह आहिस्ता-आहिस्ता प्रेम समबन्ध बनाती थी , धीरे -धीरे गर्म करने के बाद वह एक साथ हमला बोल दिया करती थी . मगर काफी देर से वह कम्मो के बदन में ऐसी गर्मी नहीं देख पा रही थी, तभी तो उसने कम्मो की कामेच्छा को गर्म करना शुरू कर दिया . उसके होठों का दीर्घ चुम्बन लेने के बाद बोली-
- आह ... बहुत आनंद आ रहा है . तू बड़ी नमकीन है कम्मो, तेरी खामोशी इस तरह अच्छी नहीं लगती .
शिल्पा- तुम भी कम नहीं हो , काफी देर मै तुम्हारा ही इन्तजार कर रही थी. सोचती थी कि पहल तुम करो तभी जवाब दिया जाए . क्योंकि फिलहाल तो मै तुमको हेई फोलो कर रही हूँ ना.
इसके बाद कम्मो ने शिल्पा के नाभिस्थल पर दांत गड़ा दिए , एकदम हलके से. इतना कि मजा भी आ जाए और दुःख भी न हो . और सचमुच शिल्पा को मजा आ गाया था . वह उसकी नरम , मुलायम जाँघों को सहलाने लगी .

कम्मो इतने जोश में आ गयी को उसने शिल्पा को अपनी बांहों में मजबूती के साथ कैद कर लिया और उसके ऊपर आ गयी . इस बार वह शिल्पा का अपनी जवाने के जलवे दिखाना चाहती थी . फिल्म खत्म हो गयी , मगर उसके कामोत्तेजक सीन कम्मो और शिल्पा के जेहन में घूमने लगे . शिल्पा अब कम्मो की गोलाइयों को आहिस्ता-आहिस्ता दबा रही थी. दोनों ही सुख के सागर में गोते लगाने के लिए बेताब थीं . दोनों रेगिस्तान में प्यासे मुसाफिर की तरह तड़प रही थीं.










Thursday, May 20, 2010

प्यार से प्यारा , यार हमारा भाग-१२

तुम्हारे रहते भी अगर फ़िक्र की जाए तो तुम्हारा मतलब ही क्या रह जाएगा ?
शिल्पा - आज तो तुमने मेरे मुंह की बात छीन ली , अगर मै कहती तो यही कहती. मेरे और तुम्हारे विचार भी अब मेल खाने लगे हैं, तुमने कम समय में ही इतना सिखा दिया है कि अब तमाम जीवन इसीसे गुजर की जा सकती है
कम्मो- मजाक उड़ा रही हो मेरा . ये बात मुझे कहनी चाहिए , मैंने सीखा है तुमसे , यह मेरा नया जन्म है और इसकी शिल्पकार तुम हो , तुमने ही मुझे एक नई विचारधारा से अवगत कराया है .
शिल्प- हां , लेकिन जिस तरह से तुमने इसे आत्मसात किया वह अपने आपमें एक रिकार्ड है . उससे तो लोगों को सीख लेनी चाहिए , कल तक तुम इतनी सेक्सी कहाँ थीं , सच तो ये है कि सेक्स की तरफ तुम्हारा कोई रुझान ही नहीं था, तुम हताश , परेशान और उलझी हुई जिंदगी जी रही थीं. अब बेफिक्र हो , किसी तरह की कोई चिंता नहीं है तुम्हें, अब तुम आराम से हंसी- खुशी अपना जीवन गुजार सकती हो . मजे लेलेकर ... यह सब तुम्हारी मेहनत की वजह से हुआ, तुमने मुझ पर भरोसा किया, मेरा कहा माना और अपने विशेष अंदाज से तुमने सब कुछ बहुत कम समय में ही अपना लिया. तुम एक अच्छी दोस्त , अच्छी हमदम और अच्छी शिष्या हो .
कम्मो- और आप भी तो किसी महान शिक्षिका से कम नहीं हैं. आपने भी तो कमाल कर दिया है. ऐसा सिखाया है कि कोई और नहीं सिकह सकता , जब तक सिखाने वाला अच्छा न हो , तब तक सीखने वाला कुछ नहीं कर सकता.
शिल्पा- मेरी गुरु हमेशा मुझसे कहती थी कि लंबे समय तक किसी शिकायत को पालने वाला या महज कल्पना लोक में जीने वाला व्यक्ति जब एक के बाद दूसरे प्रणय संबंधों को किसी को आघात पहुँचाने वाली जीत की प्राप्ति का साधन बना लेता है तब मनोविज्ञान इसे उसकी अस्वस्थ प्रवृत्ति का लक्षण मानता है।यह अस्वस्थ तत्व उस व्यक्ति में मौजूद होता है जो बचकाने ढंग से दूसरों पर आश्रित है। अपनी इस निर्भरता को बनाए रखने के लिए वह दूसरों को अपने प्रति प्रेमासक्त बनाने की चाल चलता है। दूसरे शब्दों में वह अपने प्रेमी पर उसी प्रकार प्रभुत्व जमाना चाहता है जैसे दूसरे उस पर शासन करते हैं। इसी प्रकार जब एक स्त्री, स्त्रीत्व की भूमिका निभाने की अपनी क्षमता में संदेह होने के कारण एक प्रेम संबंध छोड़कर दूसरे की ओर बढ़ती है या एक पुरूष ऐसा करता है तब दोनों में अस्वस्थ तत्व दिखता है। इसका अर्थ यह कतई नहीं है कि किसी प्रेम संबंध को तभी स्वस्थ कहा जा सकता है जब वह पूर्णत: पवित्र और मानवीय दुर्बलताओं से रहित हो। ऐसी पूर्णता मानव के लिए संभव ही नहीं है। लेकिन मनोवैज्ञानिकों की इतनी तो दृढ़ मान्यता है कि वहाँ कोई अस्वस्थ मनोवृत्ति काम कर रही है जहाँ कोई व्यक्ति प्रेम की उत्तेजना के माध्यम से अपनी आंतरिक समस्याओं से मुक्ति या राहत पाना चाहता है। मनोवैज्ञानिक हॉर्नी स्वस्थ प्रेम को संयुक्त रूप से जिम्मेदारियाँ वहन करने और साथ-साथ कार्य करने का अवसर बताते हैं। उनके अनुसार प्रेम में निष्कपटता और दिल की गहराई बहुत जरूरी है।मैस्लो ने स्वस्थ प्रेम के जिन लक्षणों की चर्चा की है वे गंभीर और प्रभावी है। वे कहते हैं सच्चा प्यार करने वालों में ईमानदारी से पेश आने की प्रवृत्ति होती है। वे अपने को खुलकर प्रकट कर सकते हैं। वे बचाव, बहाना, छुपाना या ध्यानाकर्षण जैसे शब्दों से दूर रहते हैं। मैस्लो ने कहा है स्वस्थ प्रेम करने वाले एक-दूसरे की निजता स्वीकार करते हैं। आर्थिक या शैक्षणिक कमियों, शारीरिक या बाह्य कमियों की उन्हें चिन्ता नहीं होती जितनी व्यावहारिक गुणों की।