Monday, July 25, 2011


मुजफ्फरनगर: एसडीएम के ड्राईवर ने अपनी भाभी सहित दो मासूम भतीजों को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया. पुलिस के मुताबिक मामला प्रॉपर्टी विवाद का है.

मुजफ्फरनगर के एसएसपी प्रवीण कुमार ने बताया कि आरोपी दानपाल राठी को गिरफ्तार कर लिया गया है. उन्होंने बताया कि दानपाल एसडीएम की जीप पर ड्राईवर बतौर काम करता है.

दानपाल ने रविवार रात अपनी भाभी बबीता और उसके दो मासूम बेटों सीटू उर्फ़ विक्रांत और विपुल को गोली मारकर हमेशा के लिए मौत की नींद सुला दिया.

वारदात में दानपाल उर्फ पप्पू राठी ने अपनी लाइसेंसी पिस्टल का प्रयोग किया, मगर वारदात को आत्महत्या में बदलने के लिए पप्पू ने बबीता के हाथ में तमंचा पकड़ा दिया ताकि पुलिस को ये लगे कि बबीता ने अपने दोनों बेटों की हत्या करने के बाद अपने आप को गोली मार कर आत्महत्या कर ली.

दरअसल पप्पू राठी के भाई चंचल की करीब तीन साल पूर्व बीमारी के चलते मौत हो चुकी है. चंचल की मौत के बाद उसकी पत्नी बबीता अपने दो बच्चों सीटू और विपुल के साथ पप्पू के पास ही रहती थी.

मौके पर पहुंचे पुलिस के आलाधिकारियों ने घटना स्थल का जायजा लिया और मृतक महिला के देवर से पूछताछ की तो उसने ह्त्या करने का जुल्म कबूला मगर हत्यारोपी को अपने किए पर बिलकुल भी पछतावा नहीं है.

पुलिस के अनुसार ये ह्त्या आपसी लेनदेन और जमीन जायदाद को लेकर की गई है

Sunday, July 24, 2011


उदयपुर। क्या आपने कभी पुरुषों द्वारा संतान उत्पन्न करने की घटना के बारे में सुना है? शायद नहीं। राजस्थान के स्वास्थ्य केंद्र पर ऐसी एक नहीं 32 घटनाएं दर्ज हैं। यहीं नहीं यहां एक महिला ने एक साल में 24 बार संतान उत्पन्न किया है।
गिनीज बुक के विश्व रिकार्ड को तोड़ देने वाले इन आंकड़ों से साफ जाहिर है कि यह हकीकत नहीं बल्कि एक नया घोटाला है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने शनिवार को बताया कि कोटड़ा कस्बे के गोगुंडा सामुदायिक केंद्र में स्थानीय स्वास्थ्य विभाग ने शुक्रवार को इस घोटाले का पता लगाया।
इस केंद्र की गर्भावस्था सहायिकाओं ने केंद्र सरकार की जननी सुरक्षा योजना के तहत गरीबी रेखा से नीचे की गर्भवती महिलाओं के लिए निर्धारित सहायता राशि को हड़पने के लिए गलत रिपोर्ट पेश की।
जननी सुरक्षा योजना के तहत पहले दो बच्चों के जन्म के लिए गरीबी रेखा से नीचे की महिला को 1700 रुपये और प्रत्येक प्रसव पर मिडवाइफ को इसके लिए 200 रुपये मिलते हैं। योजना का मकसद प्रसव के दौरान जच्चे और बच्चे की होने वाली मृत्यु को रोकना है। योजना के तहत गर्भवती महिलाओं को प्रसव से पहले कई तरह की सेवाएं और सुविधाएं दी जाती हैं।
अधिकारी ने बताया कि स्वास्थ्य केंद्र के रिकार्ड में ऐसे 32 पुरुषों के नाम दर्ज हैं, जिन्होंने संतान को जन्म दिया। इनमें से कुछ के नाम कई बार दर्ज हैं।
रिकार्ड के अनुसार 60 साल की महिला ने साल में दो बार संतान उत्पन्न किया और सीता नाम की महिला ने तो साल में 24 संतान उत्पन्न किए।
अधिकारी ने बताया कि गर्भवास्था वार्ड की प्रमुख ने खुद भी एक साल में 11 बार संतान उत्पन्न किये।
अधिकारी ने बताया कि घोटालों के उजागर होने के बाद वार्ड प्रमुख को पद से हटा दिया गया है और वह इस समय फरार है।
उसने बताया कि विभागीय जांच के बाद शिकायत दर्ज कराई जाएगी। जांच के लिए तीन वरिष्ठ चिकित्सकों का दल गठित कर दिया गया है।

दानिश के मेल का राज खंगालने में जुटी पुलिस , 'इम्तिहान कब देना है '

अहमदाबाद। ट्यूशन में दो लड़के हैं ..इम्तिहान कब देना है’ यह किसी अध्यापक-प्रधान अध्यापक के किसी संवाद का हिस्सा नहीं है, बल्कि आतंकियों के ई-मेल संदेश है।
गुजरात पुलिस इसमें हालिया मुंबई धमाके की तिथि का राज तलाश रही है। सूत्रों के अनुसार गुजरात पुलिस की जांच एजेंसी क्राइम ब्रांच कुख्यात आतंकवादी संगठन इंडियन मुजाहिदीन (आईएम) के आतंकी दानिश रियाज ऊर्फ साफी के कोडेड ई-मेल संदेश को डिकोड करने में सफल हो गई है।
पुलिस के हत्थे चढ़ने से पहले दानिश ने रांची के मंजर इमाम, डॉ. अबु फैजल तथा कोलकाता के हारून नामक व्यक्ति को भेजे ई-मेल में कहा था ‘ट्यूशन में दो लड़के हैं ..इम्तिहान कब देना है।’ इसे पुलिस कोडवर्ड मानते हुए 13/7 के हालिया मुंबई बम धमाकों की तारीख से जोड़ कर देख रही है। इसी साल 21 जून को गुजरात पुलिस ने दानिश को हैदराबाद से वडोदरा पहुंचने पर दबोच लिया था। इससे पूछताछ जारी है। पूछताछ में आतंकी गोलमोल जवाब दे रहा है।
‘शादी रखी है’:
छानबीन में आईएम के इस आतंकी के एक से अधिक ई-मेल एड्रेस मिले हैं। इसने एक ई-मेल में लिखा था ‘शादी रखी है’। क्राइम ब्रांच के सूत्रों का कहना है कि संभवत: इस वाक्य का प्रयोग आतंकवादी ट्रेनिंग कैंप अथवा आतंकवादी हमले की प्लानिंग के संदर्भ में किया गया होगा। इस तरह पुलिस ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि दानिश, मंजर इमाम एवं हारून आईएम के सक्रिय आतंकी सदस्य हैं। हालिया मुंबई धमाकों में इनकी प्रत्यक्ष-अथवा अप्रत्यक्ष भूमिका हो सकती है।
अधिकांश कोडेड ई-मेल साल 2010 के अंत में किए गए थे। इसलिए इन ई-मेल का मुंबई धमाकों से तालमेल देखा जा रहा है। मंजर-फैजल व हारून संबंधी सवालों पर उसका जवाब होता है कि साहब वो तो हम दुआ, सलाम के लिए किया करते थे। फैजल मध्य प्रदेश पुलिस की गिरफ्त में हैं। गुजरात पुलिस फैजल-दानिश को आमने-सामने रख कर पूछताछ करने की इच्छुक है।

चंडीगढ़। चंडीगढ़ के सेक्टर-43 में एक महीने से गैंगरेप का दंश झेल रही लड़की हैवानों के चंगुल से बच निकली। लड़की के परिवार वालों की सूचना पर पुलिस ने लड़की को सुरक्षित बरामद कर लिया है। पुलिस आरोपियों की धर पकड़ के लिए छापेमारी कर रही है।

पुलिस के मुताबिक इस लड़की का दोस्त काफी समय से अश्लील वीडियो बनाकर उसे ब्लैकमेल कर रहा था। महीने भर पहले इस लड़के ने अपने कुछ दोस्तों के साथ मिलकर लड़की को अगवा कर लिया और एक महीने तक लड़की के साथ बलात्कार किया गया।

मालूम हो कि कल जब औरोपी लड़के उसे मोहाली के एक होटल में लेकर पहुंचे तो मौका पाकर लड़की वहां से भाग निकली और अपने घरवालों को इसकी सूचना दी। इसके बाद पुलिस ने पहुंचकर लड़की को बचाया।

चंडीगढ़: एक महीने तक होता रहा महिला से गैंगरेप
पुलिस के मुताबिक जांच में सामने आया है कि लड़की के साथ गैंगरेप किया गया है। वहीं, पुलिस आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए छापेमारी कर रही है।


नई दिल्ली। बागपत में साथ पढ़ने वाली दो युवतियां के रिश्ते दोस्ती से और आगे बढ़ गए और वे लेस्बियन बन गईं। दोनों लड़कियां बचपन की दोस्त हैं। हालांकि गुड़गांव की अदालत में इन दोनों ने लिव इन रिलेशनशिप के तहत रहने का शपथ पत्र दिया है। साथ ही दावा किया कि वे शादी भी कर चुकी हैं। अदालत में सविता दुल्हन के वेश में थी तो बीना ने मर्दाना पोशाक पहन रखी थी। दोनों युवतियों ने कोर्ट में सुरक्षा की गुहार लगाई है।

पिछले दो महीने से दोनों गुड़गांव में लिव-इन- रिलेशनशिप में रह रही थीं। कोर्ट में सुनवाई सोमवार को होगी। भनोट बागपत की रहने वाली 25 वर्षीय सविता बीए की छात्रा है। उसके पास के गांव खेखड़ा की रहने वाली 22 वर्षीय वीना 12वीं की छात्रा है। दोनों एक दूसरे को 15 वर्षों से जानती हैं। सविता के परिवार वालों ने पांच साल पहले उसका विवाह कराया था।

शादी से पहले उसे कोई लड़का दिखाया गया था, लेकिन शादी किसी और से कराई गई थी। सविता का तलाक हो चुका है। इसके बाद उसने अपनी सहेली वीना से सारी बात बताई। दोनों एक दूसरे के संपर्क में रहने लगे। इसके बाद सविता घर से भागकर खेखड़ा गांव में वीना के घर रहने लगी।
सात समुन्दर पार न्यूयार्क में भी इस तरह की घटनाएं घाट रही हैं . अमरीका के न्यूयार्क में रविवार को पहली बार दो ऎसी महिलाएं कानूनी रूप से शादी के बंधन में बंधीं जिनकी उम्र 50 वर्ष से भी अधिक है ओर वे दादी बन चुकी हैं। न्यूयार्क की परंपरागत "हनीमून कैपिटल" माना जाने वाला नियाग्रा फाल्स इस अनूठे विवाह का साक्षी बना जब किट्टी लैम्बर्ट (54) और चार्ले रूड (53) ने अपने परिजनों,दोस्तों,समर्थकों,पर्यटकों और मीडिया के सामने एक दूसरे का साथ निभाने की कसमें खाई।

लैम्बर्ट और रूड के पिछली शादियों से पांच बच्चे हैं और ये दोनों ही महिलाएं दादी बनने का सुख प्राप्त कर चुकी हैं। उनके विवाह करने से यह मान्यता टूट गई है कि समलिंगी विवाह केवल युवा ही करते हैं। लैम्बर्ट और रूड़ पिछले एक दशक से एक दूसरे के साथ हैं। समलिंगी विवाह को समाज में समान दर्जा दिलाने के लिए काफी लंबे समय से संघर्ष कर रहीं इन दोनों महिलाओं ने नियाग्रा फाल्स के पार्कस लूना आईलैंड में शादी कर इतिहास रचने का फैसला किया। विवाह की रस्म पूरी होने के बाद इस युगल ने लेडी गागा के गीत "द एज्ज आफ ग्लोरी" पर डांस कर अपनी खुशी का इजहार किया।

विवाह से पूर्व लैम्बर्ट और रूड़ ने कहा कि उनकी शादी अमेरिका में समलिंगिंयों के अधिकारों की दिशा में एक बडा सकारात्मक कदम है। लैम्बर्ट ने कहा मेरे लिए यह एक अjुत पल है। हमारे साथ भी सबके समान ही व्यवहार किया जाएगा। हमारा एक बहुत बडा सपना पूरा हो रहा है। उल्लेखनीय है कि न्यूयार्क समलिंगी विवाहों को कानूनी रूप से मान्यता देने वाला अमेरिका का छठा और सबसे बडा राज्य है।


इसका सविता के परिवार वाले विरोध करते थे। मामला गंभीर होने के कारण पंचायत ने दोनों को अलग रहने का हुक्म दे दिया। पंचायत का हुक्म नहीं मानने पर दोनों को जान से मारने की चेतावनी भी मिल चुकी है। इससे डरकर दो माह पहले वीना सविता को लेकर गुड़गांव भाग आई। उसके मामा मानेसर में एक निजी कंपनी में काम करते हैं। दोनों उनके पास हैं।

अदालत में शपथ पत्र दायर कर दोनों ने कहा है कि समाज भले ही उनके रिश्ते को न माने पर वे पति-पत्नी की तरह रहेंगी। दूसरी ओर, बीना ने कहा है कि उसके तथा सविता के रिश्ते पर उसके घर वालों को कोई एतराज नहीं है। कोर्ट में सुनवाई सोमवार को होगी।

मोदी की तारीफ़ मंहगी पडी , वस्तान्वी को कुलपति पद से हटाया


देवबंद की मजलिस-ए-शूरा की एक अहम बैठक में गुलाम मोहम्मद वस्तानवी को संस्था के कुलपति पद से हटा दिया गया है.

बैठक में हुए वोटों के बंटवारे में आठ वोट वस्तानवी के विरोध में पड़े और पाँच उनके पक्ष में.

लेकिन बीबीसी से बात करते हुए वस्तानवी ने कहा कि वो इस फ़ैसले से बिल्कुल मायूस नहीं हैं और उन्हें कोई तक़लीफ़ नहीं है, हालाँकि उन्होंने कहा कि वो देवबंद के काउंसिल के सदस्य बने रहेंगे.

उन्होंने कहा, "ऐसी जगह पर जहाँ हंगामें होते हों, जहाँ लोगों की टांगें खींची जा रही हों, मैं वहाँ काम कर ही नहीं सकता था. काम तो वहाँ किया जाता है जहाँ सुकून हो. देवबंद में कुछ लोग हैं जो दारुल-उलूम अपनी जागीर समझते हैं कि एक गुजराती आदमी यहाँ आकर कैसे बैठ गया. ऐसे लोगों को जलन है."

वस्तानवी के मुताबिक उनके छात्रों में से मात्र कुछ ही उनके खिलाफ़ थे, लेकिन उन्हें भी भड़काया गया था.

मजलिस-ए-शूरा की रविवार को हुई वोटिंग के बारे में वस्तानवी ने कहा कि बैठक में कुछ लोग उनसे इस्तीफ़ा लेने का मन बनाकर आए थे.

वस्तानवी ने कहा, "वोटिंग नहीं होनी थी. रिपोर्ट में मोदी के मामले में मुझपर कोई आरोप नहीं लगाए गए थे. लेकिन रिपोर्ट के बाद मुझसे इस्तीफ़ा देने को कहा गया. मैंने कहा मैं कैसे इस्तीफ़ा दूँ. संस्था में हंगामा किसने किया और कराया, इसका तो रिपोर्ट में ज़िक्र नहीं है, इसलिए ये रिपोर्ट अधूरी है. इस पर कमेटी ने कहा कि आपको इस्तीफ़ा देना पड़ेगा. मैने कहा कि मैं पूरी रिपोर्ट आने के बाद ही इस्तीफ़ा दूंगा."

वस्तानवी ने कहा कि बैठक में कुछ लोग ये सोचकर आए थे कि अगर वो इस्तीफ़ा नहीं देते हैं, तो उनकी छुट्टी करनी है.

'काम का मौका नहीं'
ऐसी जगह पर जहाँ हंगामें होते हों, जहाँ लोगों की टांगें खींची जा रही हों, मैं वहाँ काम कर ही नहीं सकता था. काम तो वहाँ किया जाए जहाँ सुकून हो. मेरे छात्रों में बहुत कम लोग मेरे खिलाफ़ थे, लेकिन जिन्होंने उन्हें भड़काया, उन्हें सभी जानते हैं. देवबंद में कुछ लोग हैं जो उसे अपनी संपत्ति समझते हैं कि एक गुजराती आदमी यहाँ आकर कैसे बैठ गया. ऐसे लोगों को जलन है.
ग़ुलाम वस्तानवी
पूर्व कुलपति के मुताबिक उन्हें देवबंद में अपने कार्यकाल के दौरान काम करने का मौका नहीं दिया गया.

वस्तानवी ने कहा कि कमेटी की रिपोर्ट तो उनके पक्ष में थी लेकिन उन्होंने पहले ही कहा था कि तीन सदस्यीय कमेटी की रिपोर्ट चाहे उनके पक्ष में हो या नहीं, वो अपने पद से इस्तीफ़ा दे देंगे.

ग़ौरतलब है कि वस्तानवी को इसी वर्ष जनवरी में मजलिस-ए-शूरा ने ही दारुल उलूम का कुलपति नियुक्त किया था, लेकिन उनकी गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में कुछ टिप्पणियों की दारुल उलूम में और उसके बाहर कड़ी आलोचना हुई थी. उसके बाद से ही उनके इस्तीफ़े की मांग की जाने लगी थी.

ग़ुलाम मोहम्मद वस्तानवी ने कहा था कि गुजरात में मुसलमानों की स्थिति काफ़ी बेहतर है और अब समय आ गया है कि मुसलमान अतीत को भुलाकर आगे बढ़ें.

इस बात पर कई मुस्लिम संस्थाओं ने आपत्ति जताई थी.

मोदी विवाद
लेकिन बीबीसी से बातचीत में वस्तानवी ने कहा कि नरेंद्र मोदी पर उनकी टिप्पणी का दारुल-उलूम से कोई लेना-देना नहीं था.

नरेंद्र मोदी मामले का दारुल-उलूम से कोई लेना-देना नहीं था. मेरे साक्षत्कार का ताल्लुक गुजरात से था, वहाँ के विकास से था. मैने इस बारे में सफ़ाई भी दी थी कि गुजरात में विकास मात्र मोदी ने नहीं किया है, विकास तो केंद्र ने मिलकर किया है. मीडिया ने लोगों को गुमराह किया.
ग़ुलाम वस्तानवी
उन्होंने कहा, "मेरे साक्षत्कार का ताल्लुक गुजरात से था, वहाँ के विकास से था. मैने इस बारे में सफ़ाई भी दी थी कि गुजरात में विकास मात्र मोदी ने नहीं किया है, विकास तो केंद्र ने मिलकर किया है. लेकिन मीडिया ने लोगों को गुमराह किया."

हैदराबाद के लोकसभा सदस्य असदुद्दीन ओवैसी ने कहा था कि वस्तानवी के बयान को मुस्लिम समुदाय कभी स्वीकार नहीं कर सकता क्योंकि उनकी नज़र में मोदी सैंकड़ों मुसलमानों की हत्या के लिए ज़िम्मेदार हैं.

वस्तानवी के बयान के बाद मजलिस-ए-शुरा ने एक कार्यवाहक कुलपति नियुक्त करने के अलावा वस्तानवी पर लगे आरोपों की जांच के लिए एक तीन सदस्यीय समिति बनाई थी जिसे सभी मुद्दों की जांच करके अपनी रिपोर्ट देनी थी.

वस्तानवी दारुल उलूम के सौ वर्ष के इतिहास में वहां के कुलपति बनने वाले पहले गुजराती कुलपति थे.

ग़ुलाम मोहम्मद वस्तानवी गुजरात से आते हैं और उन्होंने एमबीए की भी पढ़ाई की है. वस्तानवी सूरत के रहने वाले हैं और गुजरात और महाराष्ट्र के सीमावर्ती इलाकों में कई शिक्षा केंद्र भी चलाते हैं

Saturday, July 23, 2011

विगोरा हाई पावर का कमाल

विवाहित जीवन बने खुशहाल http://replpharma.com/images/Vigoura_Hy_Power.jpg

आर ई पी एल की प्रसिद्द होम्योपैथिक दवा विगोरा हाई पावर के सेवन से लोगों के विवाहित जीवन में खुशहाली आ गयी है. जो लोग बिस्तर पर अपनी पत्नी को सम्पूर्ण संतुष्टि नहीं दे सकते ऐसे लोगों के लिए विगोरा हाई पावर आशा की नई किरण बनकर उभरी है. सबसे भरोसेमंद और असरकारक दवा के रूप में विगोरा हाई पावर का शुमार होता है. कुछ लोग सिर्फ वादे करते हैं , मगर विगोरा हाई पावर सच्चा काम करता है. इसके सेवन से ७० साल का बूढा भी अपने आपको २१ साल का ताकतवर नौजवान समझने लगते हैं. इसका इस्तेमाल वे लोग भी करते हैं जो शारीरिक रूप से मजबूत होते हैं . ऐसे लोगों का सोचना है की हमेशा के लिए अगर यौवन को सभालना है तो अभी से उपाय करना ही बुद्धिमता है. कुछ लोग तो ऐसे हैं जिनका वैवाहिक जीवन सिर्फ इसलिए उजड गया क्योंकि वे पत्नी को उस तरह का जिस्मानी सुख नहीं दे सकते थे, जिसकी वाह ख्वाहिश रखती थी. अब वे लोग विगोरा हाई पावर का शुक्रिया अदा करना नहीं भूलते. विगोरा हाई पावर की सबसे बड़ी खासियत ये है की जो कोई इसका सेवन करता है उसे खाने की आदत नहीं पड़ती . सिर्फ तीन बोतल का कोर्स ही हमेशा के लिए काफी होता है. इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं होता. आज हजारों लोग विगोरा हाई पावर की वजह से सुखी, संतुष्ट और खुशहाल जीवन बिता रहे हैं. अगर आप भी अपने क़दमों में खुशिया चाहते हैं. मौज , मस्ती, शक्ति चाहते हैं तो विगोरा हाई पावर से बेहतर और क्या विकल्प हो सकता है