Saturday, July 10, 2010

नई दिल्ली। बाप बनना बड़ी जिम्‍मेदारी का काम है। यह जिम्‍मेदारी निभाने में काफी खर्च भी करना पड़ता है। पर आजकल एक उल्‍टा चलन चल पड़ा है। कुछ छात्र ‘बाप’ बन कर कमाई कर रहे हैं।महानगरों में यह चलन जोर पकड़ रहा है। छात्र स्‍पर्म डोनेट कर अपना जेब खर्च निकालते हैं। स्‍पर्म बैंक उनके स्‍पर्म जमा करता है और एक बार में एक से दो हजार रुपये तक देता है। बैंक यह स्‍पर्म आईवीएफ के जरिए बच्‍चा पैदा करने वाले किसी नि:संतान दंपती को बेचता है। इस तरह छात्र कमाई भी कर लेते हैं और किसी नि:संतान दंपती के बच्‍चे का ‘बाप’ भी बन जाते हैं। हालांकि ‘बाप’ के रूप में उनके इस दर्जे को कोई कानूनी या सामाजिक मान्‍यता नहीं होती। सच तो यह है कि उन्‍हें पता भी नहीं होता कि उनके स्‍पर्म से कौन बच्‍चा, कहां पैदा हो रहा है।

`मैं स्पर्म डोनेट करना चाहता हूं, जिससे मैं कुछ कमाई कर सकूं।` आजकल इस तरह के विज्ञापन मीडिया में खूब आते हैं। बड़े शहरों में बड़ी संख्‍या में छात्र स्‍पर्म डोनेट करते हैं। कई छात्रों ने खुद को इनफर्टिलिटी सेंटर्स पर रजिस्‍टर्ड भी करा रखा है। वहां वे नियमित रूप से अपने स्‍पर्म डोनेट करते हैं। जहां माइनस 1960 डिग्री पर स्‍पर्म को सुरक्षित रखा जाता है और आईवीएफ में इस्‍तेमाल किया जाता है। दिल्‍ली विश्‍वविद्यालय के छात्र रोहित (बदला हुआ नाम) का कहना है कि इसमें उनका कुछ जाता नहीं है, पर जेबखर्च मजे में निकल जाता है।अब देखिए दूसरा विज्ञापन। `चाहिए लंबा, खूबसूरत और पढ़ा-लिखा स्पर्म डोनर, जिसकी आदतें उसके पिता से मेल खाती हों।` जाहिर है, ऐसा इसलिए ताकि दान किए गए स्‍पर्म से जिस दंपती की गोद भरी जाए, उसके बच्‍चे के भी लंबा, खूबसूरत और बुद्धिमान होने की संभावना ज्‍यादा हो। भारत में कुछ समय पहले तक जरूर इस विकल्प को नकारा जाता था, लेकिन अब कई संतानविहीन प्रतिष्ठित परिवारों में इसे मान्यता दी जा रही है।

कीमती बाइक का शौक, गर्लफ्रेंड के साथ मस्‍ती, होटलों की दावत, अच्‍छा पहनावा आदि कारण हैं जो छात्रों को स्पर्म दान करने के लिए मजबूर कर रहे हैं। दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और हैदराबाद जैसे बड़े शहरों में प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थाओं की भरमार है। इनमें पढ़ने वाले छात्र अपना खर्च निकालने के लिए यह तरीका खूब आजमा रहे हैं। इंफर्टिलिटी सेंटर्स भी स्पर्म लेने के मामले में नौजवानों और छात्रों को प्राथमिकता देते हैं। परिवार से मिली नैतिकता की शिक्षा के कारण कुछ छात्र हिचकिचाते हैं, लेकिन जब उन्हें पूरी तरह गोपनीयता का आश्वासन मिलता है तो वे इंकार नहीं करते। एक सैंपल के लिए उन्हें करीब दो हजार रुपये तक दिए जाते हैं।

इसमें कोई बुराई नहीं मानते हैं छात्र

विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों को इसमें कोई बुराई नजर नहीं आती। नाम न बताने की शर्त पर एक छात्र ने कहा कि यदि स्पर्म दान करने से कुछ अतिरिक्त आमदनी होती है तो इसमें बुराई क्या है। और फिर हम उन परिवारों की मदद ही कर रहे हैं, जो संतान के लिए तांत्रिक या ऐसे ही फर्जी बाबाओं के चक्कर लगाकर लाखों रूपए खर्च कर चुके होते हैं और फिर भी उनके हाथ निराशा ही लगी होती है।

आसान नहीं है स्पर्म दान



क्या स्पर्म दान का मतलब, केवल इनफर्टिलिटी केंद्र पर जाकर स्पर्म देना और कीमत लेकर लौट आना है? नहीं। यह इतना आसान है। इसके लिए लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। छात्र का एचआईवी, ब्लड शुगर, हैपेटाइटिस बी और सी, मानसिक स्थिति और यौन रोगों के बारे में अलग-अलग टेस्ट कर पूरा परीक्षण किया जाता है। किसी भी व्यक्ति का पहली बार दिया गया स्पर्म इस्तेमाल नहीं किया जाता। करीब तीन माह तक उसका पूरा परीक्षण किया जाता है और इसके बाद सही पाए जाने पर उसे फिर स्पर्म देना पड़ता है। पूरा विवरण जानता है स्पर्म लेने वालास्‍पर्म देने वाले को भले ही पता नहीं होता है कि उसके स्‍पर्म से किस परिवार में बच्‍चे की किलकारी गूंजगी, पर स्पर्म लेने वाला परिवार दाता के बारे में पूरी जानकारी पता करता है। कोशिश होती है कि पैदा होने वाला बच्‍चा अपने पिता से मिलता-जुलता ही दिखे। साथ ही, वह बेवकूफ नहीं निकल जाए। इसलिए स्‍पर्म दाता की पढ़ाई-लिखाई के बारे में खास तौर पर पता लगाया जाता है। इसके अलावा रूप रंग, बालों और आंखों का रंग भी विशेष महत्व रखता है, जिससे कि बच्चा पिता से अलग न दिखे। अधिकांश परिवार अपने ही धर्म के लोगों का स्पर्म लेना पसंद करते हैं।

आजकल बड़ी संख्या में छात्र स्पर्म दान के लिए आगे आ रहे हैं और यह काफी अच्छा है। उन्होंने कहा कि पहले केवल व्यवसायिक तौर पर सक्रिय लोग ही स्पर्म दान के लिए आते थे, जिनका उद्देश्य केवल पैसा कमाना था। उनका सामाजिक स्तर भी काफी नीचे होता था। लेकिन आज पढ़े लिखे छात्र सामने आ रहे हैं, जो भविष्य के शिशुओं के लिए भी काफी बेहतर है। उन्होंने कहा कि फर्टिलिटी ऑपरेशन में विशेषज्ञ की हैसियत से भी कोई समस्या नहीं दिखाई देती और यह पूरी तरह सुरक्षित ह

Friday, July 9, 2010

प्यार , भाग-६०

कहा जाता है कि जिंदगी बिखरे हुए सामानों को एकसाथ मिलाकर बनाया हुआ वह मकान होता है जहां खुशियों और गमों का एक साथ बसेरा होता है। अगर इस हवेलीनुमा जिंदगी का एक सामान भी इधर-उधर हो जाए तो जीवन की नैया डगमगाने लगती है। इस जीवन का प्राणतत्व होता है परिवार। और इस परिवार के दो सूत्रधार होते हैं - पति और पत्नी। अगर इन दोनों में एक पहिया भी गड़बड़ हो जाए तो जीवन की खुशियां बिखरने लगती है।अगर इस हालात में कोई एक साथी नपुंसकता के शिकार हों तो दांपत्य जीवन बेरंग सा लगने लगता है। ऐसे में धैर्य और संयम की आवश्यकता होती है। इस माहौल में आप उनलोगों से संपर्क करके सलाह ले सकते हैं जो इस तरह की समस्याओं से दो-चार हो रहे हैं यही सब सोचकर झंकार अपने साथ आर ई पी एल का हाई पावर मुसली आयल साथ लेकर गयी थी. । ताकि वह शुजात से मन माफिक आनंद प्राप्त कर सके .उसे याद रहे थे वे शब्द जों उससे उसकी गुरु ने कहे थे -

इनलोगों से आपको न केवल भावनात्मक संबल मिलेगा वरन इस समस्याओं से निबटने में भी सहायता मिलेगी। इसके अलावा आप उनसे यह भी पूछ सकती हैं कि इन परिस्थितियों में उन्होंने अपनी जिंदगी में खुशियों के रंग घोलने के लिए कौन-कौन से उपक्रम किए हैं।इसके साथ ही अपनी तरफ से भी खुशियों को समेटने का प्रयास करना चाहिए। इससे उनमें न केवल हीन भावना पनपेगी वरन वे अवसाद ग्रस्त भी हो सकते हैं।ऐसे माहौल में अन्य बातों के साथ जिन बातों का ध्यान रखना होता है उनमें सबसे मुख्य बात है कि सेक्स या शारीरिक संबंध ही खुशियां पाने का एकमात्र जरिया नहीं है। रोमांस से भी जीवन के सफर को अच्छा खासा हसीन बनाया जा सकता है . अच्छी बातों और अच्छे स्पर्श भी जीवन को सुकून प्रदान करते हैं.ऐसी ही कुछ बातें सोचती- सोचती वह शुजात के बताये होटल के प्रेसीडेंट सुइट में पंहुच गयी . यह भी इत्तेफाक ही था कि कुछ पलों के बाद ही वहां पर शु़जात आ धमका था . उसके दिल की धडकनें तेज हो गयी. अरमान मचलने लगे. वह रोजाना ग्राहकों के साथ उसके तन -मन की प्यास बुझाने जाया करती थी , मगर इतने बड़े रईस के साथ रात गुजारने का मौका उसको पहली बार ही मिल रहा था. वह जिस भी ग्राहक से मिलती थी , उसीसे यह झूठ जरूर बोलती थी कि वह कुंवारी है और पहली बार उसीके साथ हमबिस्तर हो आरही है. झंकार दिखने में इतनी इनोसेंट , इतनी खूबसूरत थी कि लोग उसकी बातों पर जल्दी से यकीन भी कर लेते थे. वैसे भी जब कोई पुरुष बाजार में जाता है तो तो यह सोचकर ही जाता है कि दूकान में रखी हर चीज बिकाऊ है और जरूरी नहीं कि उसे खरीदने वाला वह पहला शख्श हो. शुजात के मिलते ही झंकार ने उसका गर्मजोशी से स्वागत किया. होलीवुड की फिल्मों की हीरोइन की तरह उसने शुजात के होठों का फ़टाफ़ट चुम्बन लिया और उससे लिपट गयी. शुअजत के कदम डगमगा रहे थे. वह उसे बांहों में भरकर होटल के सबसे शानदार कमरे में प्रवेश कर गया. जैसे पैसे वैसी चीज. कमरा जितना मंहगा था , दिखने में वह उससे कहीं ज्यादा आकर्षक नजर आ रहा था. भोग विलास की सभी सुविधाएँ मौजूद थीं. झंकार ने पूछा-

-क्या आप हमेशा ऐसे होटलों में ही आते हैं ? या फिर यह पहला चांस है ?

शुजात नहीं जान, मैं अक्सर ऐसे ही होटल्स में आना पसंद कर्ता हूँ मगर तुम्हारे बार का मालिक जुबैद मेरा खास दोस्त है , उसके बार -बार आग्रह करने पर मैं वहाँ गया था. मगर अनुभव अच्छा रहा . तुम जों मिल गयी हो . वैसे मैं बतादूं कि आजतक मैंने कभी किसी बारबाला के साथ रात नहीं गुजारी , यकीन मानो . जों खास दोस्त हैं, उन्हींके साथ मैं खास क्षण गुजारता हूँ.










Thursday, July 8, 2010

प्यार , भाग-५९

कोई ऐसा काम , जिसमे इज्जत भी हो और ठीक ठाक पैसा भी हो. कोई छोटा -मोटा बिजनेस भी कर सकती हो .
झंकार- क्या मगर ? ऐसा कौन सा काम किया जा सकता है ? मैट्रिक पास लड़की को यहाँ कौन नौकरी देगा ? झाड़ू -पौंछा तो मैं कर नहीं पाउंगी. इस चमक -दमक की आदत जों लग चुकी है. अच्छा आप कोई सजेस करो . कहीं सिफारिश करो , अगर मुझे लायक नौकरी लगी तो जरूर विचार करूंगी . अब तो खुश हो ?
शुजात- मैं कोई जबरदस्ती नहीं कर रहा हूँ, मैं तो बस कह रहा हूँ. मेरे विचार रख रहा हूँ. अगर तुम्हें पसंद नहीं हैं तो कोई बात नहीं है. झाड़ू-पौंछा से भी कई अच्छे काम हैं जों मैट्रिक पास को मिल सकते हैं. मैं कुछ सोचूंगा तुम्हारे बारे में , कुछ जुगाड लगा सकता हूँ लेकिन पहले तुम्हें इसके बारे में दृढ निश्चय करना होगा . सही है न .
झंकार- चलो न कहीं अकेले में बात करते हैं. जब पहली मुलाक़ात में ही आप मेरे बारे में इतना सोचने लगे तो मेरे साथ एक रात गुजारने के बाद क्या करोगे ? तब तो मेरे ख़याल से कहीं मेरी नौकरी लगा ही डालोगे . आप बड़े लोग हैं, आपके लिए कौन सी बड़ी बात है .
बार में रंगारंग महफ़िल सज रही थी. ज्यादातर ग्राहक झंकार की तरफ ही नोटों की गद्दियाँ दिखाया करते थे. वहां जाना झंकार की मजबूरी थी , मगर बड़ी सावधानी से वह पैसे लेकर फिर से शुजात के पास आ जाया करती थी. बहाने से वह उसके जिस्म से कई बार टच हो जाती थी , उसके हाथ कुछ न कुछ करते ही रहते थे. कभी वह शुजात के खास अंग पर हाथ फिराती तो कभी उसकी जाँघों को सहलाती थी. शुजात मस्त होकर पैग पर पैग चढ़ा रहा था , वह आज ही दिओल के सारे अरमान निकाल लेना चाहता था . उसके विचारों में तूफ़ान आने लगा, जिस्म सुलगने लगा , उसने सोचा कि आज की रात झंकार के साथ रंगीन कर ली जाए मगर इस बात को वह अपने दोस्त और इस बार के मालिक जुबैद से छिपाना भी चाहता था. इसलिए उसने जुबैद की बजाय अपने एक दूसरे दोस्त को फाइव स्टार होटल में कमरा बुक कराने को कहा. जल्द ही उसका मैसेज भी आ गया. कमरा बुक हो चुका था . उसने झंकार को भरोसे में लेने की गरज से कहा-
-अगर मैं तुमसे कुछ कहूँ तो उसे किसीसे कहोगी तो नहीं ?
झंकार - कभी नहीं , मगर पूरा भरोसा हो तभी कहना , कहीं तुम्हें पछताना न पड़े .
शुजात - मैं तुम्हारे साथ चलने के लिए तैयार हूँ , मैंने होटल भी बुक करा लिया है मगर ?
झंकार- मगर क्या ? अब क्या तकलीफ है ? रात भर के लिए लेकर चलना है , कोई परेशानी नहीं , मैं तैयार हूँ.
शुजात -बात ये है कि तुम इस बात को जुबैद को मत बताना कि मैं तुम्हारे साथ जा रहा हूँ, वो मेरा दोस्त है और मैं नहीं चाहता कि उसका कोई नुक्सान हो , मैं तुम्हारी पूरी फीस देकर ही तुम्हें ले जाना चाहता हूँ.
झंकार- फीस की चिंता कौन कमबख्त कर्ता है , आप मेरे साथ रात गुजारने के लिए तैयार हो गए , मेरे लिए इससे बढ़कर और क्या खुशी हो सकती है ? मैं तो खुशी से नाचना चाहती हूँ, आप देंगे मेरा साथ ? आओ न थोड़े से ठुमके लगाते हैं . मैं अपनी खुशी को रोक ही नहीं पा रही हूँ. आप बेफिक्र रहें जुबैद सर को छोड़ें , कानों कान भी किसीको कोई खबर नहीं हो पाएगी . बोलो कौन से होटल आना है. सीधी मैं होटल पहुंचूं या रास्ते में कहीं मिलना है ?
शुजात- होटल झिलमिल. फाइव स्टार है . मैंने सोचा कि तुम्हारे स्टेंडर्ड का ही होटल होना चाहिए और प्रेसीडेंट सुइट बुक किया है. बहुत मजा आएगा . कमरा नंबर ७१० ही. तुम जल्दी करना . मैं होटल पहुचता हूँ.
झंकार- ठीक है , काउंटर पर पहले २० हजार जमा करने पड़ते हैं, क्या मैं कर दूं ?
शुजात ने उसे रुपये निकालकर दे दिए और होठों -होठों में ही मुस्कराने लगा. वह जानता था कि बार वाली लड़कियां पैसे के पीछे पागल रहती हैं. जों झंकार पैसे को अहमियत नहीं दे रही थी उसने तुरंत २० हजार की रकम मंगली. मांगने में उसने ज़रा भी देर नहीं लगाई. वह अपनी फीस एडवांस में वसूल कर चुकी थी.

Wednesday, July 7, 2010

प्यार , भाग -५८
झंकार - क्या आप सच कह रहे हाँ ? आज तक कितनी लड़कियों के संपर्क में आये हैं ? तब तो खूब अनुभवी होंगे ?
शुजात- इतना ज्यादा भी नहीं , लड़कियों के संपर्क का मतलब ये भी नहीं है कि सबके साथ अपने सम्बन्ध बेडरूम तक
पहुच गए थे . इसका मतलब ये है कि रोमांस जमकर किया . कोलेज के जमाने में भी , और अब ऑफिस में भी मजे
में कोई कटौती नहीं है , बल्कि और भी बढ़ चढ़कर सुख बटोरता हूँ. ऐसा आनंद ही अच्छा रहता है. ऐसा भी न हो कि
जीवन भर रोगों से लड़ते रहें और फिर बेमौत काल के गाल में समा जाएँ, ये अलग बात है कि जों आया है , उसे एक न
एक दिन जाना ही है , मगर समय से पहले कुत्ते की मौत मरने से क्या फायदा ? और जानबूझकर मरना तो और भी गलत है
. जब हम ये जानते हैं कि असुरक्षित सेक्स करने से एड्स हो सकता है या फिर अन्य यौन रोग हो सकते हैं तो हमें इससे डरकर
रहना चाहिए . डरने का मतलब है कि हमें सुरक्षा के इंतजाम कर लेने चाहिए , वो चाहे जिस भी तरीके से क्यों न हो .
झंकार- बुरा न माने तो एक बात पूछूं ? पूछ ही लेती हूँ. क्या आप बता सकते हैं कि जिन लोगों को एड्स नहीं होता , या फिर
और कोई यौन रोग नहीं होता , तो क्या वे लोग अमर रहते हैं ? कभी नहीं मरते ?
शुजात- वो तो मैं पहले ही कह चूका हूँ कि जों आया है , उसे जाना ही होगा. मगर आँखें बंद करके गड्ढे में नहीं गिरा जा सकता न.
झंकार- जहाँ तक मेरी बात है तो आप निश्चिन्त रह सकते हैं. होटल वाले हमारा मेडिकल चेक अप कराते रहते हैं. यहाँ तक कि
जब इस बार में किसी लड़की को एंट्री कराई दी जाती है , उस वक्त भी अच्छी तरह से मेडिकल चेक अप कराया जाता है , और एड्स की तो खास जांच करवाई
जाती है , एक जगह पर नहीं , अलग- अलग जगहों पर . ताकि किसी तरह का कोई रिस्क न रहे. बिना कंडोम रिश्ता नहीं बनाने की सख्त सलाह
दी जाती है और समय -समय पर जांच होती रहती है . मेरी तो एड्स की आज ही रिपोर्ट आई है चाहो तो कैप्टन को बुलाकर रिपोर्ट
मंगावाये देती हूँ. आपकी आप जाने , आपने कभी इसकी जांच करवाई है , या नहीं ?
शुजात- नहीं , कभी नहीं. मुझे जांच करवाने की जरूरत कभी इसलिए महसूस नहीं हुई क्योंकि मैं असुरक्षित कर्ता ही नहीं . पहली बात तो मैंने आज तक
किसी गैर महिला से शारीरिक सम्बन्ध बनाया ही नहीं है .
झंकार - ये आपसे किसने कह दिया कि असुरक्षित सेक्स के कारण ही एड्स होता है . अगर किसी व्यक्ति को यह रोग है तो उसका खून किसी भी कारण
से अगर किसी दूसरे व्यक्ति के जिस्म में चला जाता है तो वह भी रोगी हो सकता है . खून का संक्रमण सेविंग कराते समय भी हो सकता है. इंजेक्शन लगाते
समय भी हो सकता है और भी छोटे -मोटे ऐसे कई कारण हैं. अगर आपने अभी तक किसी गैर के साथ करीबी सम्बन्ध नहीं बनाये तो अच्छी बात है .
मैंने भी इस काली कोठरी में रहते हुए कभी अपने दामन को कलंकित नहीं होने दिया . शायद मैं आपके लिए बची हुई थी. मगर आपसे मेरा निवेदन है
कि जाँच जरूर करवा लेना. हर आदमी यह सोचता है कि उसे कोई रोग नहीं हो सकता, उस पर कोई मुसीबत नहीं आ सकती . लेकिन ऐसा होता नहीं
है. बीमारी किसीका मुंह देखकर नहीं आती , बड़े लोग कहते हैं कि मुसीबतों से अगर मुंह चुराना चाहिए , वरना ये घटने के बजाय बढ़ती ही जाती हैं.
शुजात- हाँ , यी बात मुझे पसंद आयी, अब पता चला कि सिर्फ तुम्हारा चेहरा ही सुन्दर नहीं है बल्कि तुम एकल सुन्दर सलाहकार भी हो , अनुभवी
भी हो , जीवन के बारे में बहुत कुछ जानती हो . कितनी पढ़ी -लिखी हो तुम ?
झंकार- कहाँ साहब , ज्यादा पढाई -लिखाई के लिए पैसे कहाँ से आयें ? जैसे-तैसे करके मैट्रिक तक पढ़े हैं . उसके बाद पढाई छोड़ दी . जब खाने भर
की भी ठीक से पूर्ती नहीं होती , तो पढाई के खर्चे कहाँ से आयें ?
शुजात- हाँ यार . देश में गरीबों का बहुत बुरा हाल है . अच्छा तुम कोई दुसरा काम क्यों नहीं करतीं ?

Monday, July 5, 2010

प्यार , भाग-५६

और आखिर हो भी क्यों नहीं ? शुजात कोई साधारण ग्राहक तो था नहीं, वह बार के मालिक जुबैद का दोस्त था और जुबैद उसके साथ ही मौजूद था. उसके इशारे पर एक विशेष सुन्दर हसीना शुजात के पास आकार बैठ गयी. उसने मुस्कराते हुए पहले अपना नाम बताया , फिर चखने की प्लेट से सींग दाना लेकर खाने लगी. उसका नाम झंकार था. जब वह बात करती तो उसकी मीठी आवाज से शुजात के दिल के तार झंकृत हो उठते थे. शुजात ने तारीफ़ करते हुए कहा -
-बहुत सुन्दर बार है यार, जब मैं पहले आया था तब यह फ्लोर नहीं था क्या ? आज तो सजावट भी बड़े गज़ब की लग रही है और हसीनों का भी जवाब नहीं . बड़ी मद मस्त डांसर हैं. ज़रा एकाध पैग लगाएं तो जरा मजा आएगा , नाचने के लिए थोड़ी सी हलक से उतारनी जरूरी होते है. आज पूरा आनंद लिया जाएगा.
जुबैद- तुम्हारा बार है यार, और तुम क्या कल ही यहाँ आये थे ? अरे आपको पूरे ६ माह हो गए , और यहाँ तो हमको हर हफ्ते बदलाव लाना पड़ता है. यह फ्लोर अभी नया बनाया है. पहले यह नहीं था. बाजू वाला दूकान बेचने को राजी नहीं था, अपने पार्टनर ने 'भाई ' को बोलकर हूल पट्टी दिलवाई तब जाकर दुकानदार हमें बेचने को राजी हुआ, वरना हमें तो राग दे रहा था. अब सब कुछ ठीक हो गया है. इसके नीचे भी एक फ्लोर बनाया गया है . जब छापा मारने कोई आता है तो लड़कियों को फटाक से उसी तहखाने में छिपा देते हैं.
शुजात- इतनी जल्दी सब कुछ कैसे हो पाता होगा ? डांस पर तो बंदी है न, फाईन देना पड़ता होगा ? पुलिस वाले तो जरूर आतेहोंगे ? वे किसीको नहीं छोड़ते ?
जुबैद- सब कुछ मैनेज हो जाता है यार, उन्हीं में से कुछ लोग हमको पहले ही सूचना दे देते हैं , सूचना पाकर हम ये लाल-लाल लाइट जलवा देते हैं, इससे फिर सारी हसीनाएं नीचे के तहखाने में छिप जाती हैं.छापा मारने वालों को कुछ नहीं मिलता. उन्हें सिर्फ गाने वाले लोग दिखाई देते हैं. वे चले जाते हैं. उन्हें जाते ही फिर से धमाल शुरू हो जाता है. वो देखो यार वो झुमके वाली तुम्हारी तरफ बहुत घूर-घूरकर देख रही है ?
शुजात- छोडो यार, पहले झंकार से तो बात करलें .
झंकार खिलखिलाकर हंसदी . उसने नीचे से शुजात को चिकौटी भी काट ली, शुजात पीने के बाद ही प्रेम लीला शुरू करने के पक्ष में था मगर झंकार जल्दबाजी में नजर आती थी, शायद उसे डर था कि चिड़िया कहीं उड़ न जाए . बार में काम करने वाली लड़कियों को काफी अनुभव हो जाता है. वे देखते ही पहचान जाती हैं कि कौन मोटी चिड़िया है और कौन सिर्फ चिरकुट है मगर रईस दिखने का नाटक कर रहा है. झंकार भी शुजात को देखते ही उसकी हस्ती जान गयी थी. इसलिए उसे जल्दी से जल्दी अपने कब्जे में कर लेना चाहती थी. शुजात ने पूछा-
-बाहर जाती हो क्या ? क्या लेती हो एक रात का ?
झंकार- पसंद की कोई कीमत नहीं होती साहब, अगर मैं आपको पसंद हूँ तो चलो, कोई होटल बुक करादो, जब मन भर जाए और खूब मजा आये तब जों इच्छा हो, दे देना , कोई डिमांड नहीं करूँगा .
शुजात- करूँगा कि करूंगी ? क्या बंगाली हो ?
झंकार- जी, बंगाली हूँ , इसीलिए कभी -कभी ऐसी गडबड हो जाती है. हम आपका पूरा ध्यान रखेंगे . आप सर के दोस्त हैं, हमारा फर्ज बनता है कि आपकी खातिरदारी में कोई कसर न रहे. आप भी रंगीन मिजाज नजर आते हैं. आज तक आपने इतना प्रेम रस नहीं पिया होगा , ऐसा अमृत पिलाऊंगी . आपकी सारी थकान रफूचक्कर हो जायेगी. आपके साथ-साथ मुझे भी सुख मिलेगा क्योंकि मैंने आज तक ऐसा कभी भी आपके जैसे सुन्दर कस्टमर के साथ रंगरेलियां नहीं मनायीं, सच तो ये है कि मैंने किसी युवक को आज तक नहीं देख , जों आपके जितना सुन्दर हो. जों आप जैसा दैसिंग दिखता हो. आपको तो देखते ही नशा सा हो जाता है.












Sunday, July 4, 2010

प्यार , भाग-५५

कुछ हसीनाएंतो बिलकुल ही नई आयी हैं. उनमे से एक गाँव की है. गरीब है. कमाने के हिसाब से आई है , करेक्टर की अच्छी है. मजबूरी में हमारे बार में काम करने के लिए तैयार हुई है लेकिन कस्टमर के साथ जाने से साफ़ मना करती है . मैंने उसे यकीं दिलाया है तब जाकर काम करने को तैयार हुई है. थोड़ा बहुत गा लेती है , दिखने में पटाखा है इसलिए रख ली है. हांलाकि कस्टमर बहुत कोशिश करते हैं , अच्छी खासी टिप्स देते हैं मगर जूली तो आखिर जूली है. अपना नाम उसने यही बता रखा है , अब यह उसका असली नाम है नकली , इसका इसका ज्ञान उसीको होगा. अगर तुम कहो तो तुम्हारे लिए उसे कन्वेंस करके देख लेता हूँ , शायद मान जाए, उससे भी बेहतर होगा कि तुम मिल्लो उससे . तुम तो प्यार का झूठा इजहार करने में माहिर हो, झूठे वादे करने में भी उस्ताद हो . शायद तुम उसे बहुत जल्दी पता लोगे. बहुत गज़ब की चीज है, इतना कहे देता हूँ.
शुजात- छोडो यार , ये बार वाली सब सती सावित्री बनने का ही नाटक करती हैं , बाकी जाती सब हैं .
जुबैद- इस मामले में हमसे ज्यादा नहीं जान पाओगे , हमारा कहना मान लों , वरना पछ्ताओगे , कहीं और जगह पीने से हमारे बार में ही पी लों. मस्त गाना सुनवाउंगा, ठीक से परिचय कराउंगा , फिर तुम जानो , तुम्हारा काम जाने, तबियत खुश हो जायेगी तुम्हारी . सच कहता हूँ यार. आगे तुम्हारी मर्जी,
शुजात - अगर तुम इतना सब बता रहे हो तो ठीक है. मैं तैयार हूँ . सब सेटिंग कराओ , ठीक तरह से. आज अगर एक्जाम का दिन है तो एक्जाम ही सही . मैं भी देखूं कि हसीनाएं आखिर हमसे दूर क्यों होती जा रही हैं, क्या कारण है जों हम हर बार फेल होते जा रहे हैं. पहले शिल्पा ने ठुकराया , फिर उसकी सहेली कम्मो ने उल्लू बनाया , अब यह चैलेन्ज है . चलो देखते हैं , उसका हुस्न जीतेगा या हमारी जवानी ?
शुजात ने जुबैद के साथ चलने की हामी भरदी . जुबैद का अँधेरी में पार्टनर शिप में एक बार है . बार तो नाम के लिए है , बाकी लोग उसे पिकप पॉइंट के नाम से ज्यादा जानते हैं. वहाँ पर कस्टमर आते हैं , अपनी मर्जी की फुलझड़ी पसंद करते हैं और फिर उसकी कीमत चुकाकर उसे अपने साथ अपने घर, फ्राम हाउस , लोज या होटल ले जाते हैं. रात -रात भर आनंद लेने के बाद वे उन्हें छोड़ देते हैं. जुबैद हमेशा अपने बार में कम उम्र की सुन्दर हसीनाएं ही रखता है . इसके लिए वह आस -पास के राज्यों में अपने दलाल छोड़कर रखता है. अखबारों में विज्ञापन देकर मोडलिंग, फिल्म , ती वी सीरियल , नौकरी आदि के नाम पर उन्हें बहकाया जाता है और सीधा जुबैद के बार में काम पर लागा दिया जाता है . वह बेहद शातिर बन्दा है . लड़कियों को महीने के दस , बीस , तीस हजार के अनुबंध पर रखता है . उनेहं घर नुहैया कराता है और उन लड़कियो की मार्फ़त एक -एक रात में ही एक -एक लड़की से दस , बीस , तीस हजार रुपये कामता है . शुजात की दोस्ती भी उससे बार मी ही हुई थी . उस समय जुबाद एक बार का मैनेजर हुआ करता था. शुजात ने उसे धन उधार दिया, कुछ बैंकों से कर्जा दिलवाया और इस तरह वह एक अच्छे -खासे कमाऊ बार का मालिक बन गया. उसने एक पार्टनर भी रख लिया था ताकि धन या संसाधन की कोई कमी णा आने पाए. उसका पार्टनर एक कुख्यात नेता का बेटा था इसलिए गुंडों, पुलिस या मोहल्ले टाइप नेताओं से उसे संरक्षण मिलता रहता था. लेकिन वह था वास्तब में यारों का यार . उसने शुजात का कर्ज कभी का लौटा दिया था मगर वह उसका एहसान अभी तक नहीं भूला था . अक्सर वह शुजात से मिलने आता रहता था. उसकी फ़ोकट में खिलाता -पिलाता रहता था।
थोड़ी देर में ही वे अँधेरी के उस दिलकश बार में पहुच गए । खूब गज़ब की महफ़िल सजी थी। डांस बंद होने के बावजूद वहाँ पर जबादस्त नृत्य हो रहा था। शुजात की जीभ लार डाल रही थी। उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया। बार में कई दरवाजे थे , दरबान उन्हें खोल रहे थे। जैसे कोई शहंशाह पधार रहे हों।












Saturday, July 3, 2010

भाग -५४

-लगता है बीडू किसी छम्मक छल्लो ने जबर्दस्त दिल पर अटैक कर दिया है , तभी तो इतना परेशान हो रहे हो , वरना तुम किसे गिदानते हो , क्या मैं जानता नहीं हूँ तुमको ? या फिर कोई चिड़िया जाल में फंसकर भी उड़ना चाहती है ? कहीं ऐसा तो नहीं कि हाथ नहीं रखने दे रही , या फिर सेक्स के लिए इनकार कर रही है ?
शुजात - बहुत रसीले होते जा रहे हो जुबैद , क्या तुम्हारी नस -नस से वाकिफ नहीं हूँ मैं ? पेट का हाल दाई से छिपाने चले हो ? ऐसा होता है कहीं ? हम भी जानते हैं कि तुम्हारे स्टाफ में कोई ऐसी खूबसूरत लड़की नहीं है जों तुम्हारी अंकशायिनी न बनी हो , रात को जिसने तुम्हारे बिस्तर की शोभा न बढाई हो ?
शुजात काम सुख एक सुख सुख है बंदे , जिसे पाकर लड़कियां मेरी दीवानी हो जाती हैं, मगर वहां तक पहुचने के लिए बहुत पापड बेलने पड़ते हैं. प्यार का चारा फेंकना पडता है . ऐसा नहीं है कि कोई जादू मारा और सुन्दर हसीना आपकी जाँघों पर आकर बैठ गयी .सेक्स मजेदार है मगर इसके लिए थोड़े से हाथ पाँव मारने पड़ते हैं. मेरे सलाहकार हमेशा कहते हैं कि सेक्स की सुखद अनुभूती प्रकृति की एक अनुपम देन है। सेक्स में चरमसुख की प्राप्ति जहां तनमन को संतुष्टि देती है, वहीं मन प्रफुल्लित रहने से सौंदर्य में भी निखार आता है। विवाह के बाद आमतौर पर महिलाओ का रूप एकदम से खिल जाता है। आँखों में एक अलग सी चमक आ जाती है। संतुष्टिदायक सेक्स न केवल शारीरिक सुख से जुडा है, बल्कि इसका भावनात्मक पहलू भी अत्यंत महत्तवपूर्ण हैं। जब पुरूष एंव महिला का आपसी शारीरिक संसर्ग होता है,तो महिला में हारमोन का उत्पादन बढ जाता हैं। हारमोन की अघिकता महिलाओं को सेक्स में आक्रामक बनाती है,साथ ही उनमें आत्मविश्वास भी भर देती है।
शुजात- लेकिन यार सेक्स संबंघो में तन के साथ-साथ मन का समर्पण भी जरूरी है। यदि बेड पार्टनर के दिल को दोस्त की किसी बात से चोट पहुंची है, तो सेक्स के लिए उसका तनमन न तो हमको को सहयोग दे पाएगा, न ही वह सहवास के दौरान उत्तेजना महसूस कर पाएगी। यही बात हसीना पर भी लागू होती है। यदि दोस्त किसी बात से तनावग्रस्त है तो इस से हसीना की यौन क्षमता पर भी नकारात्मक असर पडेगा.
जुबैद -सेक्स एक ऎसी प्रकिया है, जो शारीरिक एवं मानसिक अभिव्यक्ति व्यक्त करने का कुदरती माघ्यम है। जिस व्यक्ति का मन-मस्तिष्क जितना स्वस्थ होगा, उसकी सेक्स अभिव्यक्ति भी उतनी ही आनंदमय होगी। तनाव व चिंता से मुक्त सेक्स से रोम-रोम पुलकित हो उठता है और तन-मन में नई स्फूर्ति एवं खूबसूरती का एहसास होता है।मगर इसके प्यारे सबसे पहला आकर्षण करीब आने से बढ़ता है। ऐसे में अपनी पार्टनर के करीब जाने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि आप पूरी तरह साफ और सुंदर दिख रहे हैं। क्‍योंकि आपके चेहरे के एक्‍सप्रेशन ही उसे आपकी ओर आकर्षित करेंगे, जिससे उसके अंदर सेक्‍स की भूख जागेगी।
पुरुषों और महिलाओं दोनों के साथ अलग-अलग स्थितियां होती हैं। पुरुष अपनी स्‍त्री पार्टनर के आकर्षण से आकर्षित हो जाता है, जबकि महिलाओं के लिए सेक्‍स से पहले भावनात्‍मक रूप से करीब आना जरूरी होता है। जबतक आप भावनात्‍मक रूप से करीब नहीं जाएगे, तब तक वो आपके करीब नहीं आएगी। हालांकि दोनों के लिए प्रेम भरी बातें काफी महत्‍व रखती हैं।
शुजात -बात तो कमाल की करती हो मियां , लेकिन अपने सेक्स ज्ञान पर उड़ बहुत रहे हो , क्या बात है , कोई खास चिड़िया तुम्हारे चंगुल में फंस गयी है क्या ? बहुत दिनों से आया नहीं तुम्हारे होटल पर . आना पडेगा किसी दिन . मगर वहां मिलते भी हो या फिर हसीनों का पहलू ही गर्म करते रहते हो ?
जुबैद- अब बिलकुल एशिया भी नहीं है यार . हसीना अपनी जगह, और काम अपनी जगह. ये अलग बात है कि हम ठहरे यारों के यार . हम भी तो एक अदद और बड़ा दिल रखते हैं, अगर तुम्हें जरूरत हो तो एकाध फुलझड़ी का इंतजाम करा दिया जाएगा.