धीरी-धीरे दो अनजान बदन एक होने लगे... जीशान नया लड़का था... बड़े घर की बिगड़ी हुयी औलाद थी... बदन कसा हुआ था... रोजाना जिम जाता... घर में खाने -पीने की कोई कमी नहीं थी... हर तरह से मौज बहार थी... उसके पिता बड़े सरकारी अधिकारी थे... दौलत कमाने के चक्कर में उस पर ध्यान ही नहीं दे पाए..रंजना उसके विषय में सब कुछ जानकारी हासिल करना चाहती थी मगर यह समय दूसरा था... यह मौज मस्ती करने का वक्त था... जीशान ने उसकी अपनी मजबूत बाहों में कसकर भीच लिए ... उसके होठों का प्रगाढ़ चुम्बन लेने के बाद वह बोला-
-आह, इन गुलाबी होठों का रस चखने के बाद अब अमृत पीने की इच्छा भी नहीं बची... सचमुच, शराब पीने से भी इतना नशा नहीं चढ़ता जितना की इन होठों का चढ़ रहा है... इसके आगे दुनिया का हर पेय पदार्थ फीका है....
रंजना मदहोश हो गयी,, जीशान की मीठेई बातों में वह ख़ुद को बहकी-बहकी महसूस कर रही थी... वह नशे की हालत में थी... जीशान की बातों ने उसको और भी बहका दिया था... वह कहने लगी-
-अगर तुम शराब से तौबा कार्लो तो मैं रोजाना इन होठों का रसपान कराने के लिए तैयार हूँ... तुम जब चाहो मुझे याद कर सकते हो, तुम्हारी बातों में मुझे सच्चाई नजर आ रही है...
जीशान- मेरे कदम बहक चुके हैं, मैं बर्बादी की राह पर कदम रख चुका हूँ, शायद अब मेरा सभलना मुश्किल है... मैं इस बुराई के दलदल में धंस चुका हूँ, जैसे ही शाम होती है, मेरे दिल की घंटियाँ बजने लगते हैं... फ़िर मुझे शराब चाहिए, शबाब चाहिए... प्रतिदिन मुझे एक नई लड़की की जरूरत पड़ती है... चाहे किसी भी तरह क्यों न मिले... अब देखो न कल रात भर मैं इस लड़की के साथ था, जो अब रमेश को सुख दे रही है... यह भी बहुत बड़े खानदान से ताल्लुक रखती है... इसका हाल भी मेरे जैसा ही है... जब इसने मुझे अपनी समस्या बताई तो रमेश मेरे साथ अपनी पार्टनर बदलने के लिए तैयार हो गया... ख़ुद रमेश भी तो अक्सर पार्टनर बदलता रहता है...
जीशानकीबात सुनकर रंजना सन्न रह गयी... अपने आप पर काबू करते हुए पूछा -
-अपना रमेश ? ये रमेश, मेरा दोस्त ? तुम इसकी बात कर रहे हो क्या ?
जीशान - हाँ , यही रमेश , तुम नहीं जानती ? मेरे पास तो चलो पैसे की कोई कमी नहीं है... मेरे फादर को रोजाना रिश्वत से ही लाखों रुपये मिल जाते हैं, उन पर इसलिए कोई फर्क नहीं पड़ता , मगर तुम बोलो, यह रमेश पैसे कहाँ से लाता है, यह तो गरीब घर से है न ? इसके पास तो कभी कभी फीस के पैसे भी नहीं होते हैं...
रंजना- तो फ़िर कहाँ से लाएगा पैसे ? यही तो मैं कह रही हूँ , तुम्हें पता है ?
जीशान- हाँ अच्छी तरह पता है... आज दस हजार तो मैं इसको दूंगा... सिर्फ़ इसलिए की इसने मुझे तुमसे मिलवाया ... तुम जैसी हूर परी मुझे आज तक कोई नहीं मिली... कुछ पैसे यह तुम जैसी गर्ल फ्रेंड से लेता है... अब मैं इसको जो रकम दूंगा, उससे यह दस दिनों तक आराम से एश कर सकता है... शराब पी सकता है... अपनियो किसी ख़ास दोस्त पर खर्च कर सकता है, कोई ऐसी दोस्त जिसको जिस्म के बदले में कुछ रकम की जरूरत हो... बाकी रकम इसको उन महिलाओं से मिल जाती है , जिनकी यह यौन इच्छाओं की पूर्ति करता है...
जीशान की एक एक बात उसके दिल पर वज्र की तरह लग रही थी... जिस जीशान को उसने अपना दोस्त समझा था, अपना होने वाला पति समझा था वह दस -दस हजार में बाजार में उसकी इज्जत बेच रहा था... रंजना को बड़ी शर्म आ रही थी... रमेश ने उसको वैश्या बनाकर रख दिया था... जिस रमेश को वह अपना सब कुछ समझती थी , वह एक भादवे की भूमिका निभा रहा था... जिस रमेश को वह वफ़ा और सादगी की मूर्ती समझती थी, वही रमेश रंगीला रतन बना फिरता था...
Tuesday, January 6, 2009
Monday, January 5, 2009
रंगीला रतन, भाग-68
भले ही कुछ पल की मुलाकात ही सही मगर ये भी क्या कम है ? तुम्हारा जिस्म इतना कसा हुआ है की मेरी जीभ लार डालने लगी है... आह, देखो न मेरा मन कितना बहक रहा है... अगर तुम्हें एतराज न हो तो हम शुरुआत करें?
रंजना- अब तुमने मुझे इस लायक ही नहीं छोडा की मैं अपनी इच्छा जाहिर कर सकूं, अब तो मैं इतनी ज्यादा उत्तेजित हो चुकी हूँ की ख़ुद ही परेशां हूँ... सोच रही हूँ की अगर तुम थोड़ी और ठहर जाते, प्रपोज नही करते तो मैं ख़ुद तुम्हें आमंत्रण दे देती...
जीशान - ओह, यह तो मेरी खुश नसीबी है, मैं फ़िर से शुक्रिया अदा करता हूँ...
रंजना- अच्छा, अब क्या सारा समय फोरमेलिटी में ही गुजार देंगे ?
जीशान समझ गया की उसका तीर सही निशाने पर लग गया है ... अब ड्रग्स का असर भी साफ़ दिखने लगा था... उसका बदन अकड़ने लगा था...मन में आग लगी हुई थी... उसने एक बार फ़िर रमेश की तरफ़ निगाह दौडाई , वह जीशान की महिला मित्र पर पूरी तरह से हावी हो रहा था... रंजना ने फ़िर कुछ सोच विचार नहीं किया... तुंरत समर्पण कर दिया... उसने अपने बैग से कंडोम निकालकर जीशान के हाथ पर रख दिया... वह आना कानी करने लगा... उसे कंडोम पहनना पसंद नहीं था... उसने कहा भी-
- ये क्या है मेरी जान ? इसे पहनकर मजा नहीं आता ... जब दोस्ती की है तो खुलकर करो, मोहब्बत करनी है तो दिल से करो, ऐसे ठीक नहीं है... कम ओन् यार , इसको एक तरफ़ अलग रखदो... मुझे ज़रा भी पसंद नहीं...
रंजना- ये तुम क्या कह रहे हो, जानते हो? बिना कंडोम के सम्बन्ध बनाने का मतलब समझते हो ? सिर्फ़ और सिर्फ़ मौत... मौत के अलावा कुछ नहीं... ऐसी भूल कभी मत करना... मैं हमेशा इसका इस्तेमाल करती हूँ...
जीशान- मुझे लगता है यह सब विज्ञापन का प्रभाव है... फर्क इतना है की तुम पर यहरंग कुछ ज्यादा ही चढ़ गया है... यह बीमारियाँ महज एक भ्रम है.... हम जैसे लोगों को यौन बीमारियाँ हो ही नहीं सकतीं...
रंजना- हर आदमी इसी वहम का शिकार हो जाता है... फ़िर जीवन भर पछताने के सिवाय कोई चारा नहीं बचता... क्या तुम नहीं जानते की एड्स जैसे घातक रोग की कोई दवा नहीं है... इसमे आप कोई रिस्क नहीं ले सकते... किसी भी तरह का प्रयोह नहीं कर सकते... इस बात का तुम्हारे पास ठोस जवाब है की तुम्हें या हमें एड्स नहीं हो सकता... हर इंसान यही सोचता है की उसको कभी कोई दिक्कत हो ही नहीं सकती, कोई मुसीबत आ ही नहीं सकती... जब की आती सबको हैं... आखिरकार रोग या मुसीबतें भी तो जीवन का प्रमुख हिस्सा हैं... ये अगर नहीं आयें तो करें क्या ? ये सब बीमारियां हमको -तुमको भी हो सकती हैं... इसलिए बचाव जरूरी है... रमेश मेरी बात मानता है... कभी मुझसे जिद नहीं की... लेकिन आज शायद वह बिना कंडोम के ही सफर कर रहा है... भगवान् तुम्हारी मदद करे रमेश, सुन रहे हो ?
रमेश- आज तो भूल हो गयी, अब हो गयी सो हो गयी... फ़िर कभी नहीं होगी...
जीशान- तुमने आज मेरी आँखें खोल दीं, तुम बहुत अच्छी वक्ता भी हो... आज और अभी से मैं तुम्हरी हर बात को मानूंगा... हम जब भी मिलेंगे, कंडोम का इस्तेमाल जरूर करेंगे , वादा रहा...
रंजना- शुक्रिया... मेरे साथ ही नहीं जिसके साथ भी सम्बन्ध बनाना ,अपना बचाव जरूर याद रखना...
लोहा गर्म था, बस हथोडा मारने की देर थी... जीशान अब रंजना को अपार सुख देने की कोशिश करने लगा ... रंजना गर्म आहें भरने लगी...
रंजना- अब तुमने मुझे इस लायक ही नहीं छोडा की मैं अपनी इच्छा जाहिर कर सकूं, अब तो मैं इतनी ज्यादा उत्तेजित हो चुकी हूँ की ख़ुद ही परेशां हूँ... सोच रही हूँ की अगर तुम थोड़ी और ठहर जाते, प्रपोज नही करते तो मैं ख़ुद तुम्हें आमंत्रण दे देती...
जीशान - ओह, यह तो मेरी खुश नसीबी है, मैं फ़िर से शुक्रिया अदा करता हूँ...
रंजना- अच्छा, अब क्या सारा समय फोरमेलिटी में ही गुजार देंगे ?
जीशान समझ गया की उसका तीर सही निशाने पर लग गया है ... अब ड्रग्स का असर भी साफ़ दिखने लगा था... उसका बदन अकड़ने लगा था...मन में आग लगी हुई थी... उसने एक बार फ़िर रमेश की तरफ़ निगाह दौडाई , वह जीशान की महिला मित्र पर पूरी तरह से हावी हो रहा था... रंजना ने फ़िर कुछ सोच विचार नहीं किया... तुंरत समर्पण कर दिया... उसने अपने बैग से कंडोम निकालकर जीशान के हाथ पर रख दिया... वह आना कानी करने लगा... उसे कंडोम पहनना पसंद नहीं था... उसने कहा भी-
- ये क्या है मेरी जान ? इसे पहनकर मजा नहीं आता ... जब दोस्ती की है तो खुलकर करो, मोहब्बत करनी है तो दिल से करो, ऐसे ठीक नहीं है... कम ओन् यार , इसको एक तरफ़ अलग रखदो... मुझे ज़रा भी पसंद नहीं...
रंजना- ये तुम क्या कह रहे हो, जानते हो? बिना कंडोम के सम्बन्ध बनाने का मतलब समझते हो ? सिर्फ़ और सिर्फ़ मौत... मौत के अलावा कुछ नहीं... ऐसी भूल कभी मत करना... मैं हमेशा इसका इस्तेमाल करती हूँ...
जीशान- मुझे लगता है यह सब विज्ञापन का प्रभाव है... फर्क इतना है की तुम पर यहरंग कुछ ज्यादा ही चढ़ गया है... यह बीमारियाँ महज एक भ्रम है.... हम जैसे लोगों को यौन बीमारियाँ हो ही नहीं सकतीं...
रंजना- हर आदमी इसी वहम का शिकार हो जाता है... फ़िर जीवन भर पछताने के सिवाय कोई चारा नहीं बचता... क्या तुम नहीं जानते की एड्स जैसे घातक रोग की कोई दवा नहीं है... इसमे आप कोई रिस्क नहीं ले सकते... किसी भी तरह का प्रयोह नहीं कर सकते... इस बात का तुम्हारे पास ठोस जवाब है की तुम्हें या हमें एड्स नहीं हो सकता... हर इंसान यही सोचता है की उसको कभी कोई दिक्कत हो ही नहीं सकती, कोई मुसीबत आ ही नहीं सकती... जब की आती सबको हैं... आखिरकार रोग या मुसीबतें भी तो जीवन का प्रमुख हिस्सा हैं... ये अगर नहीं आयें तो करें क्या ? ये सब बीमारियां हमको -तुमको भी हो सकती हैं... इसलिए बचाव जरूरी है... रमेश मेरी बात मानता है... कभी मुझसे जिद नहीं की... लेकिन आज शायद वह बिना कंडोम के ही सफर कर रहा है... भगवान् तुम्हारी मदद करे रमेश, सुन रहे हो ?
रमेश- आज तो भूल हो गयी, अब हो गयी सो हो गयी... फ़िर कभी नहीं होगी...
जीशान- तुमने आज मेरी आँखें खोल दीं, तुम बहुत अच्छी वक्ता भी हो... आज और अभी से मैं तुम्हरी हर बात को मानूंगा... हम जब भी मिलेंगे, कंडोम का इस्तेमाल जरूर करेंगे , वादा रहा...
रंजना- शुक्रिया... मेरे साथ ही नहीं जिसके साथ भी सम्बन्ध बनाना ,अपना बचाव जरूर याद रखना...
लोहा गर्म था, बस हथोडा मारने की देर थी... जीशान अब रंजना को अपार सुख देने की कोशिश करने लगा ... रंजना गर्म आहें भरने लगी...
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